एटा में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गरीब लाभार्थियों को पूरा राशन नहीं मिल रहा। कटौती, तौल में हेराफेरी और गेहूं-बाजरा की जगह चावल मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। विभागीय अधिकारियों की चुप्पी भी चिंता बढ़ा रही है।

एटा में गरीबों के राशन पर डाका (Img- Internet)
Etah: यूपी के एटा जनपद में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था एक बार फिर विवादों में घिर गई है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में राशन डीलरों की मनमानी के चलते गरीब और पात्र लाभार्थियों को पूरा राशन नहीं मिल पा रहा है।
स्थानीय लोगों और लाभार्थियों का आरोप है कि प्रति कार्ड लगभग एक किलो राशन की कटौती की जा रही है। इसके अलावा, निर्धारित गेहूं और बाजरा की जगह केवल चावल देकर खानापूर्ति की जा रही है। इस स्थिति ने जनपद में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में यह सामने आया कि कई स्थानों पर राशन वितरण शुरू होने के बावजूद राशन की दुकानें बंद मिलीं। वहीं कुछ दुकानों में सीमित मात्रा में ही राशन दिया गया। लाभार्थियों के अनुसार तौल में भी गड़बड़ी की जा रही है।
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लाभार्थियों का कहना है कि एक कांटे से पर्ची निकालकर दूसरे कांटे से तोल की जाती है, जिससे उन्हें पूरा राशन नहीं मिलता। राशन की इस हेराफेरी के कारण गरीब परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार राशन माफिया जनपद में सक्रिय हैं और गरीबों के हिस्से का राशन अपने लाभ के लिए हड़प रहे हैं। जबकि जिम्मेदार विभागीय अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए हैं।
विभागीय लापरवाही
इस चुप्पी और कार्रवाई में देरी ने लोगों में नाराजगी और असंतोष पैदा कर दिया है। ग्रामीणों और शहरवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन समय पर सख्त कदम नहीं उठाता है, तो गरीबों के निवाले पर लगातार डाका पड़ता रहेगा।
शहर में अलग-अलग इलाकों में पड़ताल के दौरान कई गंभीर समस्याएं सामने आईं। गरीब लाभार्थियों ने बताया कि राशन दुकान पर आने के बाद भी उन्हें पूरा राशन नहीं मिल रहा।
कुछ परिवारों को तो निर्धारित गेहूं और बाजरा बिल्कुल नहीं दिया जा रहा, जबकि चावल के वितरण से केवल खानपान का हिस्सा ही पूरा हो रहा है। तौल और मात्रा में गड़बड़ी ने गरीबों के घरों में खाने की कमी पैदा कर दी है।
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अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन और खाद्य विभाग इस मामले में कितनी सख्ती दिखाएगा। राशन डीलरों की मनमानी और विभागीय लापरवाही को देखते हुए यह अपेक्षा की जा रही है कि अधिकारियों को जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए।
स्थानीय लोग चाहते हैं कि राशन वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी हो और गरीबों तक पूरा राशन समय पर पहुंचे। यदि यह नहीं हुआ तो राशन माफिया और भ्रष्टाचार बढ़ते रहेंगे और गरीबों के निवाले पर संकट बना रहेगा।