महराजगंज कस्बे का रहने वाला 21 साल का एक छात्र माघ मेले में संन्यास बन गया। एक जनवरी को घर से निकला युवक प्रयागराज में माघ मेले में पहुंच गया। वहां उसकी मुलाकात एक बाबा से हुई और उसने गृहस्थ जीवन को छोड़ दिया। उसके मोबाइल पर स्टेटस देख कर घरवालों को पता चला। पढिये पूरी खबर

इकलौता चिराग बना सन्यासी
रायबरेली: महराजगंज कस्बे का रहने वाला 21 साल का एक छात्र माघ मेले में संन्यास बन गया। एक जनवरी को घर से निकला युवक प्रयागराज में माघ मेले में पहुंच गया। वहां उसकी मुलाकात एक बाबा से हुई और उसने गृहस्थ जीवन को छोड़ दिया। उसके मोबाइल पर स्टेटस देख कर घरवालों को पता चला। इसके बाद घरवाले प्रयागराज पहुंचे और बेटे को समझाने की कोशिश की। लेकिन, वह घर लौटने के लिए तैयार नहीं हुआ। मां रोते हुए बाबा से बोली-मेरा बेटा वापस कर दो। लेकिन बाबा ने कहा कि अब यह हमारा हो चुका है।
क्या है पूरी खबर?
महाराजगंज कस्बा में फोटोकापी की दुकान चलाने 48 साल के नवीन कमल रस्तोगी ने बताया कि उनका बेटा घर का इकलौता है। पूरे परिवार को उसी से उम्मीद थी। लेकिन उसने सन्यास ले लिया जिसकी वजह से वह और उसकी मां दोनों परेशान है। रोती बिलखती मां ने कहा कि उसका बेटा वापस करवा दिया जाए, लेकिन संन्यासी ने कहा कि वह अब उनका हो चुका है ।
हाथ में एक क्राइस्ट का टैटू
नवीन कमल बताते हैं कि उनके घर में उनके पिता महावीर, उनकी मां शंकर देवी, पत्नी सोनी रस्तोगी, तीन बेटियां नेहा, रानी व नव्या व एक इकलौता बेटा अमर कमल रस्तोगी रहते हैं। उनका बेटा अमर एफजी कॉलेज में बीए सेकंड ईयर का छात्र है और वह बैंक ऑफ़ बड़ौदा शाखा के नीचे एक जन सेवा केंद्र भी चलता था। उन्होंने बताया कि उनका बेटा 1 जनवरी को यह बताकर घर से निकला कि वह चर्च जा रहा है। उसके हाथ में एक क्राइस्ट का टैटू बना था।
प्रयागराज के माघ मेला?
वह नियमित रूप से चर्च जाया करता था इसलिए किसी ने कुछ नहीं कहा। लेकिन वह पूरी रात घर नहीं लौटा तो चिंता होने लगी। अगले दिन हमने फोन मिलाया तो पता चला कि वह प्रयागराज के माघ मेला में चला गया है। वहां जाने के बाद उसने वैराग्य जीवन को लेकर मोबाइल स्टेटस भी लगाया। तब हम लोगों को मालूम चला कि उसने सन्यास ले लिया है। चार दिन बाद भी वह जब घर नहीं लौटा तो उसकी बेटियों ने उसे फोन किया। लेकिन वह सही से बात नहीं कर रहा था। अगले दिन हम सभी लोग प्रयागराज गए। उसकी तलाश की।
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वहां जब हमारी मुलाकात अमर से हुई तो देखा वह संन्यास ले चुका था। वह एक बाबा के पास था हमने बाबा से कई बार मिन्नत की की कि वह अमर को घर जाने दे। लेकिन बाबा ने जवाब दिया अब यह बेटा हमारा हो गया है। यह वैराग्य जीवन में है। वापस नहीं आएगा। अमर को उसकी बहनों ने भी घर लौटने के लिए बहुत मनाया लेकिन वह तैयार नहीं हुआ ।
दिमाग को नियंत्रित करने का आरोप
अमर के ऐसा करने पर उसकी मां फूट फूट कर रोने लगी मां ने कहा कि वह परिवार का इकलौता बेटा है और उसे पर कुल परंपरा निभाने की जिम्मेदारी है ।उनका पुत्र एक अच्छा स्टूडेंट भी है और जन सेवा केंद्र भी चलता है। लेकिन अब उसने तुलसी के माला धारण कर ली है। नवीन कमल ने आरोप लगाया है कि मकान अमर के नाम होने से उसके चाचा और बड़े पिता उदय नाराज थे। उन्होंने चोरी-छिपे अमर को साधु संतों से मिलवाने का प्रयास भी किया। उन्होंने भाइयों पर तंत्र-मंत्र के जरिए बेटे के दिमाग को नियंत्रित करने का आरोप लगाया है।
अमर की मां सोनी रस्तोगी बताती है कि उनके बेटे को वापस लाने के लिए हर संभव कोशिश की गई। इकलौता बेटा हमारे बुढ़ापे का सहारा है कोरोना के बाद से उनके पति की तबीयत खराब चल रही है। जिसके चलते घर की जिम्मेदारी इकलौते बेटे पर है। हम अपने बेटे को वापस लाने का हर संभव प्रयास करेंगे। बहनों की शादी में भाई का सबसे बड़ा कार्य होता है। आखिर वह रोल कौन निभाएगा। उन रस्मों को कौन पूरा करेगा ।