
स्वतंत्रता दिवस पर उठा एकता का संदेश (IMG: Dynamite News)
Deoria: देवरिया में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश की एकता, लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभु दयाल सिंह ने अपनी बात रखी। डाइनामाइट न्यूज़ से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि आज देश के सामने कई ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका समाधान केवल सरकार के स्तर पर संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय समस्याओं के साथ-साथ जनहित, लोकहित और समाजहित से जुड़े कई मुद्दे भी हमारे सामने हैं। ऐसे में हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। देश को आगे ले जाने के लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की अलग-अलग धाराएं होना जरूरी है। हर व्यक्ति का अपना नजरिया हो सकता है, लेकिन राष्ट्रहित ऐसा विषय है जिस पर सभी को एक साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि समाज में बढ़ रही वैचारिक कटुता और आपसी द्वंद्व को कम किया जाए।
बातचीत के दौरान प्रभु दयाल सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर के विचारों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर हमेशा गांव, गरीब, किसान, मजदूर और आम आदमी की आवाज को महत्व देते थे। उनके मुताबिक चंद्रशेखर के राजनीतिक चिंतन में लोकतंत्र और सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी। उनका मानना था कि देश की तरक्की का वास्तविक मतलब तभी है, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
स्वतंत्रता के वास्तविक अर्थ को लेकर भी वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का मतलब केवल विदेशी शासन से मुक्ति हासिल करना नहीं है। स्वतंत्रता तभी सार्थक होगी, जब समाज में भय, भेदभाव, अन्याय और आपसी संघर्ष की जगह समानता, सम्मान और भाईचारे की भावना मजबूत होगी।
प्रभु दयाल सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही अपने कर्तव्यों को भी समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के प्रति जिम्मेदारी केवल सीमा पर तैनात जवानों तक सीमित नहीं है। आम नागरिक भी अपने स्तर पर देश को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।
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प्रभु दयाल सिंह ने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी, सवाल पूछने की आजादी, विचारों की विविधता और कानून का सम्मान भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए मजबूत समाज जरूरी है और मजबूत समाज तभी बन सकता है जब लोग एक-दूसरे की बात सुनें और असहमति को दुश्मनी न समझें।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने देशवासियों से उस भारत के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की, जिसका सपना स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था। उन्होंने कहा कि ऐसा भारत बनाना होगा जहां हर व्यक्ति को सम्मान मिले, गरीब और कमजोर वर्गों की आवाज सुनी जाए और कानून सभी के लिए समान रूप से काम करे। समाज में भेदभाव और कटुता कम हो तथा भाईचारे की भावना मजबूत हो।
डाइनामाइट न्यूज़ से विशेष बातचीत में प्रभु दयाल सिंह का संदेश स्पष्ट रहा कि देश की मजबूती सिर्फ सत्ता या सरकार से तय नहीं होती। इसके लिए मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ जागरूक और एकजुट समाज भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर देश का नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझे, एक-दूसरे का सम्मान करे और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे तो भारत को और मजबूत बनाया जा सकता है।
Location : Deoria
Published : 15 August 2026, 2:32 PM IST