जब थाने के बाहर धरने पर बैठ गए बेजुबान! देवरिया में आवारा कुत्तों का जमावड़ा बना चर्चा का विषय, देखें तस्वीरें

रुद्रपुर कोतवाली के बाहर आखिर दर्जनों कुत्ते क्यों जमा हुए? न तख्तियां थीं, न पोस्टर, फिर भी यह नजारा किसी अनोखे प्रदर्शन जैसा क्यों लगा?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 24 September 2026, 2:19 PM IST

Deoria: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रुद्रपुर कोतवाली गेट पर उस समय अनोखा नजारा देखने को मिला, जब दर्जनों की संख्या में कुत्ते कोतवाली के बाहर जमा दिखाई दिए। इंसानों की तरह हाथों में तख्तियां तो नहीं थीं, लेकिन उनकी मौजूदगी और भौंकने की आवाज मानो व्यवस्था से अपना दर्द बयां कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे उनकी अपनी भाषा में कोतवाली गेट पर “मुर्दाबाद-मुर्दाबाद” के नारे गूंज रहे हों।

बेजुबानों की जिंदगी पर उठे सवाल

कुत्तों की कथित फरियाद भी कम दिलचस्प नहीं थी। उनका कहना था कि पशुओं की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर समय-समय पर बड़े-बड़े आदेश और योजनाएं सामने आती हैं, लेकिन जमीन पर हालात अब भी सवाल खड़े कर रहे हैं। शेल्टर और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था की मांग लंबे समय से उठती रही है, मगर जरूरतमंद पशुओं को इसका कितना लाभ मिल रहा है, यह जमीनी तस्वीर देखकर समझा जा सकता है।

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महंगाई का असर पशुओं के भोजन पर भी

महंगाई की मार से इंसानों के साथ अब कुत्ते भी परेशान नजर आ रहे हैं। मांस-मछली और अन्य खाद्य पदार्थ महंगे होने के कारण उन्हें मिलने वाला भोजन भी प्रभावित हो रहा है। कभी जो लोग इन्हें खाना खिलाते थे, वे भी बढ़ती महंगाई के चलते दूरी बनाने लगे हैं।

कुत्तों की दूसरी शिकायत इससे भी गंभीर है। उनका आरोप है कि सड़क और मोहल्लों में उन्हें अक्सर लाठी-डंडों से पीटा जाता है, कोई पत्थर मारता है तो कभी वाहन की चपेट में आने का खतरा बना रहता है। ऐसे में उनकी जिंदगी लगातार मुश्किल होती जा रही है।

सड़क पर खतरे और हिंसा की चुनौती

वहीं, कुत्तों का यह भी कहना है कि वे रात के समय मोहल्लों और गलियों में घूमकर एक तरह से पहरेदारी करते हैं। अनजान व्यक्ति के आने पर भौंककर लोगों को सतर्क करते हैं। इसके बावजूद समाज के एक हिस्से में उनके प्रति नफरत और हिंसा का व्यवहार देखने को मिलता है।

कोतवाली गेट पर जमा इन बेजुबानों का यह अनोखा “प्रदर्शन” भले ही प्रतीकात्मक नजर आया हो, लेकिन इसने इंसान और पशु के बीच बदलते रिश्ते पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।

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सवाल यह है कि बेजुबानों की आवाज आखिर कौन सुनेगा?

जरूरत इस बात की है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित निकाय पशुओं के लिए सुरक्षित आश्रय, भोजन, उपचार और संरक्षण की व्यवस्था पर गंभीरता से काम करें। साथ ही पशुओं के साथ क्रूरता रोकने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए।

कुत्तों की इस अनोखी फरियाद का संदेश साफ है

“हम भी इसी समाज का हिस्सा हैं, हमारी जिंदगी भी जिंदगी है। हमारी आवाज सड़क से लेकर सदन तक उठनी चाहिए।”

Location :  Deoria

Published :  24 September 2026, 2:19 PM IST