नोएडा श्रमिक हिंसा मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र गिरफ्तार, इस राजनीतिक दल के लिए करता है काम

नोएडा में 13 अप्रैल को वेतन बढ़ोतरी को लेकर भड़की श्रमिक हिंसा मामले में यूपी एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र नेता योगेश मीणा को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि उसने सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ संदेश फैलाकर माहौल को उग्र बनाने और पुलिस की छवि खराब करने की साजिश रची थी।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 3 June 2026, 7:06 AM IST

Noida Desk: नोएडा में 13 अप्रैल को वेतन बढ़ोतरी को लेकर भड़की "श्रमिक हिंसा" के मामले में जांच एजेंसियों को एक अहम सफलता मिली है। यूपी एसटीएफ ने दिल्ली विश्वविद्यालय के एक छात्र नेता को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि उसने श्रमिक आंदोलन के दौरान डीसीपी के चालक को विवाद में घसीटकर पुलिस की छवि खराब करने की साजिश रची थी। साथ ही सोशल मीडिया और विभिन्न ग्रुपों के जरिए भड़काऊ संदेश प्रसारित कर माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश की गई।

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र की गिरफ्तारी

यूपी एसटीएफ ने शनिवार दोपहर दिल्ली के मोरिस नगर थाना क्षेत्र से योगेश मीणा नामक युवक को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार योगेश राजस्थान के जयपुर जिले की बस्सी तहसील के बांसखोह गांव का रहने वाला है और वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि योगेश विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में सक्रिय रहा है। वह वर्ष 2025 में डूसू अध्यक्ष पद का चुनाव भी लड़ चुका है। इसके अलावा वह एक छात्र संगठन का सदस्य होने के साथ श्रमिक और वामपंथी संगठनों की गतिविधियों से भी जुड़ा रहा है।

डीसीपी चालक को लेकर फैलाई गई थी अफवाह

पुलिस का दावा है कि हिंसा के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न ग्रुपों में यह अफवाह फैलाई गई थी कि एक डीसीपी का चालक श्रमिक हिंसा भड़काने में शामिल था। जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले में चालक अनिल कुमार को हिरासत में लेकर उसके मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड की जांच की। पुलिस को मोबाइल डेटा से कुछ ऐसे सुराग मिले, जिनसे योगेश मीणा और अनिल कुमार के बीच लगातार संपर्क की जानकारी सामने आई। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और योगेश को गिरफ्तार कर लिया गया।

हिंसा वाले दिन भी दोनों के बीच हुई थी बातचीत

पुलिस अधिकारियों के अनुसार अनिल कुमार और योगेश मीणा श्रमिक आंदोलन के दौरान एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। जांच में यह भी पता चला है कि 13 अप्रैल को हिंसा वाले दिन भी दोनों के बीच बातचीत हुई थी। आरोप है कि योगेश के कहने पर विभिन्न सोशल मीडिया ग्रुपों में भड़काऊ संदेश, ऑडियो क्लिप और पोस्ट साझा किए गए। पुलिस का दावा है कि इन संदेशों का उद्देश्य श्रमिकों को उकसाना और आंदोलन को उग्र बनाना था।

नोएडा में 200 करोड़ का जमीन घोटाला: भूमाफियाओं का कब्जा, नेताओं-अफसरों पर गंभीर आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने बैठाई SIT

मोबाइल जांच से मिले अहम सुराग

नोएडा पुलिस ने 20 मई को अनिल कुमार को गिरफ्तार कर उसका मोबाइल फोन जब्त किया था। डिजिटल जांच के दौरान कई ऐसे संदेश और संपर्क सामने आए, जिन्होंने जांच को नई दिशा दी। पुलिस के अनुसार हिंसा से जुड़े कुछ ग्रुपों में संदिग्ध गतिविधियां दर्ज की गईं, जिनके आधार पर योगेश तक पहुंचा गया।

अन्य आरोपितों की तलाश जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि योगेश मीणा की गिरफ्तारी इस मामले में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। उससे पूछताछ के आधार पर अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हिंसा भड़काने के पीछे और कौन-कौन लोग सक्रिय थे। एजेंसियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की जा रही है।

Location :  Noida

Published :  3 June 2026, 7:06 AM IST