
इस मंदिर में होती है रावण की पूजा (Image Source: Dynamite News)
Buduan: विजयदशमी का त्योहार आते ही देशभर में रावण के पुतले जलाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया था। लेकिन उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर में एक ऐसा मंदिर है, जहां दशहरे पर रावण का दहन नहीं किया जाता, बल्कि उसकी पूजा-अर्चना होती है। मोहल्ला साहूकारा में स्थित यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के कारण लोगों के बीच खास पहचान रखता है।
यहां रावण को केवल रामायण के खलनायक के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि उसकी विद्वता, पांडित्य और भगवान शिव के प्रति गहरी भक्ति को भी याद किया जाता है। यही वजह है कि दशहरे के अवसर पर इस मंदिर की परंपरा देश के दूसरे हिस्सों से अलग नजर आती है।
स्थानीय मान्यताओं और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बदायूं का यह रावण मंदिर करीब 100 साल पुराना बताया जाता है। कहा जाता है कि मंदिर की स्थापना पंडित बलदेव प्रसाद शर्मा ने कराई थी। वह भगवान शिव के अनन्य भक्त थे और रावण की शिवभक्ति से प्रभावित थे। इसी आस्था के चलते उन्होंने इस मंदिर की स्थापना कराई।
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बताया जाता है कि पंडित बलदेव प्रसाद शर्मा के बाद उनके परिवार की अगली पीढ़ियां मंदिर की देखरेख और पूजा-पाठ की परंपरा को आगे बढ़ाती रही हैं। समय के साथ यह मंदिर बदायूं की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एक विशिष्ट हिस्सा बन गया।
मंदिर में रावण की प्रतिमा भगवान शिव की आराधना करते हुए स्वरूप में स्थापित है। मंदिर परिसर में शिवलिंग और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी मौजूद हैं। यहां रावण की पूजा के पीछे उसकी शिवभक्ति और विद्वता को प्रमुख कारण माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण भगवान शिव का परम भक्त होने के साथ-साथ वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता भी था। हालांकि, रामायण में उसके चरित्र के नकारात्मक पक्ष और माता सीता के हरण को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इस मंदिर में उसकी पूजा मुख्य रूप से शिवभक्त और विद्वान के रूप में उसके स्वरूप से जुड़ी मानी जाती है।
दशहरे के दिन जब देश के अलग-अलग शहरों में रावण के पुतले जलाए जाते हैं, तब बदायूं के इस मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती का आयोजन किया जाता है। यहां की परंपरा रावण के जीवन के अलग-अलग पहलुओं को देखने का अवसर देती है।
यह मंदिर स्थानीय धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का भी उदाहरण है। जहां विजयदशमी पर रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, वहीं इस मंदिर में उसकी शिवभक्ति और विद्वता को याद किया जाता है। यही अनूठी मान्यता बदायूं के इस मंदिर को खास बनाती है।
Location : Budaun
Published : 20 October 2026, 3:18 PM IST
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