माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच अमेठी से समर्थकों द्वारा सुरक्षा की पहल की गई है। 28 जनवरी को अमेठी से प्रयागराज कूच कर तीन पालियों में सुरक्षा व्यवस्था संभालने की तैयारी है।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद
Prayagraj: माघ मेले की भीड़, आधी रात की हलचल, संदिग्ध लोगों की मौजूदगी और साधु-संतों पर लाठीचार्ज जैसे आरोपों के बीच अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सुरक्षा को लेकर माहौल गर्म हो गया है। प्रयागराज से उठी इस चिंता की गूंज अब अमेठी तक पहुंच चुकी है। हालात इतने संवेदनशील बताए जा रहे हैं कि संत की सुरक्षा के लिए अब समर्थकों को खुद मोर्चा संभालना पड़ रहा है। इसी कड़ी में अमेठी से एक बड़ी पहल सामने आई है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेठी से शुरू हुई सुरक्षा की पहल
माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ी घटनाओं के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर अमेठी से पहल शुरू की गई है। कांग्रेस के पूर्व एमएलसी दीपक सिंह ने खुद शंकराचार्य से फोन पर बातचीत कर पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की। दीपक सिंह ने बताया कि बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा कि वह सुंदर्शन चक्र धारी के भरोसे सरकारी अन्याय के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।
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पत्र में जताई गई चिंताओं पर बनी सहमति
दीपक सिंह के मुताबिक, इससे पहले उन्होंने शंकराचार्य को एक पत्र लिखा था, जिसमें शिविर क्षेत्र में संदिग्ध लोगों की मौजूदगी, आधी रात में रेकी किए जाने और साधु-संतों पर लाठीचार्ज जैसी घटनाओं का जिक्र किया गया था। फोन पर बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने इन सभी चिंताओं को स्वीकार किया और सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाई।
28 जनवरी को अमेठी से प्रयागराज कूच
बातचीत में यह भी तय हुआ कि 28 जनवरी को अमेठी से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद समर्थकों के साथ प्रयागराज संगम तट के लिए प्रस्थान करेंगे। इस दौरान करीब 150 समर्थक उनके साथ रहेंगे। सभी को पहले हालात की पूरी जानकारी दी जाएगी और सख्त अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए जाएंगे।
तीन दल, तीन पाली में सुरक्षा व्यवस्था
पूर्व एमएलसी ने बताया कि समर्थकों को 50-50 लोगों के तीन दलों में बांटा जाएगा। ये दल आठ-आठ घंटे की तीन पालियों में शंकराचार्य की व्यक्तिगत सुरक्षा और शिविर की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। पूरी व्यवस्था सेवा भाव और संयम के साथ की जाएगी।
राजनीति नहीं, संत की सुरक्षा मकसद
दीपक सिंह ने साफ कहा कि यह कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं है। उद्देश्य सिर्फ सनातन परंपरा के एक प्रमुख संत की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। समर्थक पूरी निष्ठा के साथ शंकराचार्य के साथ रहकर सेवा करेंगे और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचेंगे।