Balrampur: भारतीय दर्शन केवल आध्यात्मिकता नहीं, बल्कि जीवन जीने का वैज्ञानिक ढांचा

एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर में मंगलवार से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई जिसमें शिक्षाविदों ने एनईपी 2020 के जरिए भारतीय ज्ञान प्रणाली को वैश्विक शिक्षा से जोड़ने पर चर्चा की। वक्ताओं का मानना है कि योग, आयुर्वेद और वेद-उपनिषद जैसे प्राचीन ज्ञान को आधुनिक पाठ्यक्रम में शामिल करके भारत आत्मनिर्भर और नैतिक रूप से मजबूत शिक्षा व्यवस्था बना सकता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 28 April 2026, 7:28 PM IST

बलरामपुर। प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की बहस मंगलवार को एमएलके पीजी कॉलेज के मंच पर गूंजी। कॉलेज के बीएड विभाग और आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में वैश्विक शिक्षा के संदर्भ में भारतीय ज्ञान प्रणाली का पुनर्स्थापन: एनईपी 2020 से प्राप्त अंतर्दृष्टियाँ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का दो दिवसीय आयोजन आरंभ हुआ।

भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने की दिशा में कदम

सभागार में मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्ज्वलन के बाद कुलगीत और स्वागत गीत से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। आयोजन का केंद्रबिंदु एनईपी 2020 रहा, जिसे वक्ताओं ने प्राचीन परंपरा और समकालीन कौशल के संगम के रूप में परिभाषित किया।मुख्य अतिथि प्रो. उमेश चंद्र वशिष्ठ, पूर्व सदस्य एनसीटीई और पूर्व डीन, शिक्षा संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय ने कहा कि भारतीय दर्शन केवल आध्यात्मिकता नहीं, बल्कि जीवन जीने का वैज्ञानिक ढांचा है। उन्होंने वेद, उपनिषद और न्यायशास्त्र के उदाहरण देते हुए कहा कि एनईपी 2020 योग और आयुर्वेद जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल कर भारत को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाने की दिशा में कदम है।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के शिक्षा संकायाध्यक्ष प्रो. विजय कुमार राय ने जोर दिया कि भारतीय शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के साथ समाज और राष्ट्र का कल्याण है। यही सोच इसे वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बनाती है।

कॉलेज प्राचार्य प्रो. जेपी पाण्डेय ने स्वागत भाषण में कहा कि नई शिक्षा नीति का लक्ष्य छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ भारतीय मूल्यों और तकनीकी दक्षता का संतुलन स्थापित करना है। प्रबंध समिति के सचिव कर्नल संजीव कुमार वार्ष्णेय ने इसे छात्रों की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला मंच बताया।

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संगोष्ठी के संयोजक प्रो. एसपी मिश्र ने अतिथियों का आभार जताया। आयोजन सचिव डॉ. राम रहीस ने थीम की प्रासंगिकता समझाई। मंच संचालन बीएड छात्रा खुशबू तिवारी ने किया। इस अवसर पर प्रो. वीणा सिंह, प्रो. मोहिउद्दीन अंसारी, डॉ. अरुण कुमार सिंह सहित कई शिक्षाविद और देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्राचार्य उपस्थित रहे।

Location :  Balrampur

Published :  28 April 2026, 7:28 PM IST