बलरामपुर स्वास्थ्य विभाग में 1.40 करोड़ रुपये का बड़ा खेल, विजिलेंस जांच पूरी होते ही रसूखदारों की बढ़ीं मुश्किलें

बलरामपुर के स्वास्थ्य महकमे में एनएचएम घोटाले के बाद 1.40 करोड़ रुपये के संदिग्ध भुगतान का एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसकी विजिलेंस जांच पूरी हो चुकी है। इस घोटाले का मुख्य सूत्रधार पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव के भाई अजय श्रीवास्तव को माना जा रहा है। शासन से हरी झंडी मिलते ही आरोपियों पर कार्रवाई होगी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 12 June 2026, 1:35 PM IST

Balrampur : बलरामपुर जिले के स्वास्थ्य महकमे में इन दिनों एक बार फिर हड़कंप मचा हुआ है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) घोटाले की तपिश अभी शांत भी नहीं हुई थी कि भ्रष्टाचार का एक और बड़ा जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। इस बार मामला करीब 1 करोड़ 40 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि के संदिग्ध भुगतान से जुड़ा है, जिसकी विजिलेंस जांच अब पूरी हो चुकी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस जांच की आंच एक रसूखदार राजनीतिक परिवार तक पहुं,.रतकतचच गई है। पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव के भाई अजय श्रीवास्तव को इस पूरे खेल का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है, जिससे इलाके की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई है।

अफसरों के तबादले की अफरा-तफरी

​इस पूरे फर्जीवाड़े की कहानी साल 2018 की है, जब संयुक्त जिला चिकित्सालय में लिपिक के पद पर तैनात अजय श्रीवास्तव ने कथित तौर पर तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलकर एक बड़ा खेल रचा था। उस समय अस्पताल प्रशासन में बड़े बदलाव और नए अधिकारियों के कार्यभार संभालने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाते हुए महज दो दिनों के भीतर, यानी 24 और 25 मई 2018 को, बिना किसी तय कानूनी निविदा प्रक्रिया के अपने ही परिवार से जुड़ी चुनिंदा फर्मों को ₹1.40 करोड़ का मोटा भुगतान कर दिया गया।

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नए मुख्य चिकित्साधीक्षक ने पकड़ी वित्तीय हेराफेरी

​इस बंटरबांट का खुलासा तब हुआ जब 28 मई 2018 को नए मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. राजेश मोहन गुप्त ने कार्यभार संभाला। जब उन्होंने फाइलों और रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच की, तो उन्हें इस करोड़ों रुपये के लेन-देन में गंभीर गड़बड़ी और वित्तीय हेराफेरी की गंध आई। उन्होंने बिना वक्त गंवाए इसकी एक विस्तृत और गोपनीय शिकायत तत्कालीन प्रमुख सचिव को भेज दी। शिकायत का वजन इतना था कि सरकार ने पहले इसकी जांच एसआईआईटी को सौंपी और बाद में मामला विजिलेंस के हवाले कर दिया गया।

सालों तक चली मैराथन जांच

​सालों तक चली इस लंबी और पेचीदा जांच के दौरान विजिलेंस की टीम ने परत-दर-परत कई राज खोले। इस दौरान कई डॉक्टरों, अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए, यहां तक कि साल 2022 में शिकायतकर्ता डॉ. राजेश मोहन गुप्त का भी विस्तृत बयान दर्ज हुआ।

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विजिलेंस ने शासन को सौंपी फाइनल रिपोर्ट

अब जांच अधिकारी विजय यादव के मुताबिक, इस मामले की कानूनी प्रक्रिया अपने आखिरी पड़ाव पर है और विजिलेंस ने अपनी पूरी रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। जैसे ही लखनऊ से हरी झंडी मिलती है, वैसे ही नामजद आरोपियों के खिलाफ सीधे कानूनी हथकड़ी तैयार कर ली जाएगी। पहले से ही एनएचएम घोटाले का दंश झेल रहे इस महकमे के लिए यह नई रिपोर्ट पूर्व विधायक और उनके करीबियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ाने वाली साबित होने जा रही है।

Location :  Balrampur

Published :  12 June 2026, 1:35 PM IST