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बहेड़ी विधानसभा में डॉ. नसीम अहमद की एंट्री (Image Source:: Dynamite News)
Bareilly: उत्तर प्रदेश में बरेली के बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में 2027 के चुनाव से पहले हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। मौजूदा विधायक अता उर रहमान के सामने संभावित राजनीतिक चुनौती को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। क्षेत्र के कद्दावर नेता डॉ. नसीम अहमद के आजाद समाज पार्टी में शामिल होने के बाद स्थानीय सियासत में नए समीकरणों की चर्चा होने लगी है। उनके इस कदम को आगामी विधानसभा चुनाव में नए राजनीतिक विकल्प के उभरने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
डॉ. नसीम अहमद की राजनीतिक सक्रियता के साथ उनके पुराने चुनावी प्रदर्शन की भी चर्चा हो रही है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ा था और दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के अता उर रहमान तीसरे स्थान पर रहे थे। उस चुनाव में भाजपा के छत्रपाल सिंह गंगवार ने जीत दर्ज की थी। इस प्रदर्शन के बाद डॉ. नसीम अहमद ने बहेड़ी की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी डॉ. नसीम अहमद सपा से टिकट के दावेदार थे, लेकिन पार्टी ने अता उर रहमान को प्रत्याशी बनाया। इसके बाद अता उर रहमान ने भाजपा के छत्रपाल सिंह गंगवार को 3,355 वोटों के मामूली अंतर से हराकर जीत हासिल की। इस नतीजे ने बहेड़ी में करीबी चुनावी मुकाबले की तस्वीर सामने रखी।
2017 में डॉ. नसीम अहमद का दूसरे स्थान पर रहना और 2022 में अता उर रहमान की कम अंतर से जीत, दोनों घटनाक्रम आगामी चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। हालांकि, डॉ. नसीम अहमद के आजाद समाज पार्टी में शामिल होने से चुनावी समीकरण किस दिशा में जाएंगे, यह उनकी आगे की रणनीति और क्षेत्र में राजनीतिक सक्रियता पर निर्भर करेगा।
डॉ. नसीम अहमद के नए राजनीतिक कदम के बाद बहेड़ी में संभावित चुनावी मुकाबले को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यदि वह क्षेत्र में अपना जनाधार मजबूत करने और मतदाताओं के बीच प्रभाव बढ़ाने में सफल रहते हैं, तो आगामी चुनाव में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। मुस्लिम और दलित मतदाताओं के बीच उनके संभावित प्रभाव को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं, हालांकि इसके वास्तविक असर का आकलन अभी जल्दबाजी होगा।
दूसरी ओर, अता उर रहमान के सामने अपने जनाधार को बनाए रखने, क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत रखने की चुनौती रहेगी। बहेड़ी की सियासत में फिलहाल बदलाव की संभावनाओं पर चर्चा है, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। आखिरकार 2027 के चुनाव में जनता का रुख, प्रत्याशियों की रणनीति और राजनीतिक दलों के फैसले ही मुकाबले की दिशा तय करेंगे।
Location : Bareilly
Published : 20 October 2026, 4:49 PM IST