
Ayodhya: अयोध्या में जनवरी 2024 में हुए भव्य प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद से पिछले दो वर्षों में राम मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट की कार्यशैली को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे हैं। इस अवधि में एक के बाद एक चार बड़े विवाद सामने आ चुके हैं, जिससे आस्था के इस बड़े केंद्र की प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उंगलियां उठ रही हैं। हर बार विवाद सामने आने के बाद मामले को शांत करने का प्रयास तो हुआ, लेकिन किसी भी प्रकरण में कोई ठोस और पारदर्शी कार्रवाई न होने से श्रद्धालुओं और आम जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस बार सामने आए 'चढ़ावा चोरी' के मामले ने देशव्यापी तूल पकड़ लिया है, क्योंकि इसका सीधा संबंध भक्तों की आस्था और समर्पण से है।
राम मंदिर से जुड़ा सबसे पहला और हैरान करने वाला विवाद प्राण प्रतिष्ठा के कुछ ही महीनों बाद तब सामने आया, जब रामलला का मुकुट चोरी हो गया। शुरुआत में प्रबंधन और ट्रस्ट की ओर से इस संवेदनशील मामले को दबाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन सच ज्यादा दिनों तक छुप नहीं सका। आखिरकार, यह बेशकीमती मुकुट कारसेवकपुरम में ट्रस्ट के ही एक रसूखदार पदाधिकारी के करीबी व्यक्ति के पास से बरामद हुआ। इस घटना ने पहली बार मंदिर परिसर की सुरक्षा और आंतरिक व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी थी।
मुकुट का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि मंदिर के लिए जमीनों की खरीद-फरोख्त में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लग गए। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक आज भी यह जमीन विवाद गूंज रहा है। इसके बाद पिछले साल 'दर्शन पास घोटाला' सामने आया, जिसमें फर्जी पास बनाकर श्रद्धालुओं से मोटी रकम वसूली जा रही थी। इस खेल में कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों की संलिप्तता भी उजागर हुई थी। हालांकि, बाद में तकनीक का सहारा लेकर क्यूआर कोड वाले पास अनिवार्य किए गए, जिससे इस फर्जीवाड़े पर आंशिक रोक तो लगी, लेकिन वीआईपी दर्शन के नाम पर खेल पूरी तरह बंद नहीं हो सका।
लखनऊ अग्निकांड: सीएम योगी के निर्देश पर 4 अफसर तत्काल सस्पेंड, जानिए कौन हैं ये अधिकारी?
ताजा विवाद चढ़ावा चोरी और निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी की आशंकाओं से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे सबूत मिले हैं जो इशारा करते हैं कि मंदिर निर्माण के दौरान अपने चहेतों और रिश्तेदारों को टेंडर देकर फायदा पहुंचाया गया। इस चौतरफा घमासान के बीच विपक्ष भी पूरी तरह आक्रामक है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सीसीटीवी फुटेज गायब होने का आरोप लगाते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम के दरबार में हुए इस बड़े घोटाले का सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। वहीं, सपा सांसद अफजाल अंसारी ने इस घटना की तुलना ऐतिहासिक लूट से करते हुए मांग की है कि इस पूरे महाघोटाले की जांच किसी सरकारी एसआईटी से न कराकर, देश की चारों पीठों के पूज्य शंकराचार्यों की प्रत्यक्ष निगरानी में निष्पक्ष रूप से कराई जाए ताकि आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले बेनकाब हो सकें।
Location : Ayodhya
Published : 23 June 2026, 1:40 PM IST