‘बालिग अपनी जिंदगी के फैसले खुद ले सकता है’, आयुष मलिक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

कोर्ट में आयुष ने बताया कि वह 31 वर्ष का है और उसने वर्ष 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार किया था। उसने कहा कि यह फैसला उसने बिना किसी दबाव, डर, लालच या जबरदस्ती के लिया था और तब से वह इस्लाम धर्म की परंपराओं का पालन कर रहा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 September 2026, 2:57 PM IST

Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि एक बालिग व्यक्ति को अपनी पसंद का धर्म चुनने, उसका पालन करने और अपनी इच्छा के अनुसार जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार है।

न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने कहा कि परिवार या माता-पिता की असहमति किसी वयस्क व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजी स्वायत्तता को सीमित नहीं कर सकती।

कोर्ट में पेश हुए आयुष मलिक

यह मामला आयुष मलिक को लेकर दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा था। आयुष के दोस्त मोहम्मद सुल्तान ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि आयुष को उसके पिता ने अवैध रूप से घर में रोक रखा है।

कोर्ट के आदेश के बाद 16 सितंबर को शामली कोतवाली के एसआई रवि दत्त शर्मा ने आयुष को अदालत में पेश किया। अदालत ने आयुष और उसके पिता देवराज सिंह मलिक से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की।

आयुष ने धर्म परिवर्तन और शादी को लेकर रखा पक्ष

कोर्ट में आयुष ने बताया कि वह 31 वर्ष का है और उसने वर्ष 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार किया था। उसने कहा कि यह फैसला उसने बिना किसी दबाव, डर, लालच या जबरदस्ती के लिया था और तब से वह इस्लाम धर्म की परंपराओं का पालन कर रहा है।

आयुष ने अदालत को यह भी बताया कि वह चांदनी कुरैशी से शादी करना चाहता है।

पिता ने फैसले का किया विरोध

आयुष के पिता देवराज सिंह मलिक ने अदालत में कहा कि उनके बेटे को भटकाया गया है। उन्होंने बेटे की भलाई का हवाला देते हुए धर्म परिवर्तन और विवाह के फैसले का विरोध किया।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि किसी वयस्क व्यक्ति के व्यक्तिगत फैसलों पर अभिभावकों की असहमति उसके संवैधानिक अधिकारों को खत्म नहीं कर सकती।

पुलिस में दर्ज हुआ था धर्मांतरण का मामला

मामले की शुरुआत आयुष के पिता की ओर से 6 जून 2026 को दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि युवती ने उनके बेटे को प्रेम संबंध में फंसाकर जबरन धर्म परिवर्तन कराया।

इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने चांदनी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी और एक रिश्तेदार के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 और बीएनएस की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।

हाईकोर्ट ने आयुष को दी स्वतंत्रता

हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आयुष मलिक को अपनी इच्छा के अनुसार रहने, अपनी पसंद के धर्म का पालन करने और कानून के अनुसार वैवाहिक संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र कर दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बालिग व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए।

Location :  Prayagaraj

Published :  17 September 2026, 2:57 PM IST