अवैध कब्जे पर हाईकोर्ट सख्त: बिना किसी पुख्ता दस्तावेज सिर्फ लंबे समय का कब्जा कानूनी अधिकार नहीं

हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जे को लेकर बेहद महत्वपूर्ण कानूनी रुख स्पष्ट किया है। कोर्ट ने साफ किया कि बिना किसी पुख्ता और वैध दस्तावेज के सिर्फ लंबे समय का कब्जा किसी को मालिकाना या कानूनी अधिकार नहीं दे सकता। जानिए कोर्ट की बड़ी टिप्पणी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 1 July 2026, 3:19 PM IST

Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी रुख स्पष्ट किया है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि बिना किसी वैध दस्तावेज के केवल लंबे समय तक काबिज रहने मात्र से किसी सार्वजनिक संपत्ति पर कोई कानूनी अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने अलीगढ़ नगर निगम की भूमि पर बने आवासीय क्वार्टरों को खाली करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत ने नगर आयुक्त द्वारा जारी बेदखली संबंधी आदेश को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखा है।

दो जजों की खंडपीठ ने सुनाया फैसला

यह अहम आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने शफीकुर रहमान समेत सात अन्य लोगों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं ने अलीगढ़ के नगर आयुक्त द्वारा 15 मई 2026 को पारित आदेश और उसके बाद 6 जून 2026 को जारी किए गए बेदखली नोटिस को अदालत में चुनौती दी थी। इस नोटिस के जरिए अलीगढ़ के मौजा डोडपुर माफी स्थित नजूल प्लॉट संख्या 78 और 87 पर बने नगर निगम के आवासीय क्वार्टरों को खाली करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे कोर्ट ने सही माना है।

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याचिकाकर्ताओं की दलील: पूर्वजों को किराये पर मिले थे आवास

अदालत के समक्ष याचिकाकर्ताओं का दावा था कि नगर निगम ने इन आवासीय क्वार्टरों का निर्माण मूल रूप से अपने कर्मचारियों के लिए कराया था। हालांकि, बाद में उनके पूर्वजों को ये खाली पड़े आवास किराये पर दे दिए गए थे। याचियों ने दलील दी कि वे लंबे समय से नियमित रूप से इसका किराया जमा करते आ रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने नगर निगम के एक प्रस्ताव के अनुसार फ्रीहोल्ड कराने के लिए मांगी गई निर्धारित राशि भी जमा कर दी थी। इसी आधार पर उनका कहना था कि उन्हें इन आवासों से बेदखल नहीं किया जा सकता।

नगर निगम का रुख: याची हैं अवैध कब्जाधारी

दूसरी ओर, नगर निगम ने याचियों के दावों का कड़ा विरोध किया। नगर निगम ने अदालत में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के पास ऐसा कोई भी आधिकारिक या कानूनी दस्तावेज मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि उन्हें कभी विधिवत रूप से ये आवास आवंटित किए गए थे या वे नगर निगम के अधिकृत किरायेदार हैं। नगर निगम के अनुसार, ये सभी लोग अवैध कब्जाधारी की श्रेणी में आते हैं और इन्हें हटाने का नोटिस पूरी तरह नियमानुसार है।

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हाईकोर्ट की टिप्पणी: रसीदें नहीं देतीं कोई कानूनी अधिकार

मामले के सभी पहलुओं को देखने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई भी पुख्ता दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे, जिससे उनके इस कब्जे को वैध ठहराया जा सके। अदालत ने कहा कि जिन रसीदों के आधार पर याची फ्रीहोल्ड का दावा पेश कर रहे हैं, वे उनके पक्ष में किसी भी प्रकार का कानूनी अधिकार स्थापित नहीं करती हैं। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि प्रस्तुत की गई रसीदों से यह कहीं भी साबित नहीं होता कि नगर निगम ने उनसे कभी किराया स्वीकार किया था। तथ्यों के अभाव में हाईकोर्ट ने बेदखली नोटिस में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया।

Location :  Prayagraj

Published :  1 July 2026, 3:19 PM IST