इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: वैवाहिक विवाद में केवल नाम होने पर नहीं होगी आपराधिक कार्रवाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में केवल किसी का नाम शामिल होने पर आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकती। ठोस आरोप और साक्ष्य के बिना पति के रिश्तेदारों के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 May 2026, 2:42 PM IST

Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वैवाहिक विवादों में केवल किसी व्यक्ति का नाम शामिल होने मात्र से उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि जब तक किसी के खिलाफ ठोस और विशिष्ट आरोप न हों, तब तक आपराधिक कार्रवाई करना उचित नहीं है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकलपीठ ने दी, जो पत्नी द्वारा ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

मामले का विवरण: हाथरस का मामला

यह मामला उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के शासनी कोतवाली क्षेत्र का है। पीड़िता ने वर्ष 2020 में अपने पति, सास-ससुर, देवर और ननद के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला ट्रायल कोर्ट में गया।

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ट्रायल कोर्ट ने दिया राहत भरा फैसला

हाथरस के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 26 मई 2023 को, और उसके बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने 29 सितंबर 2025 को पति के रिश्तेदारों को आरोपों से मुक्त कर दिया। पीड़िता ने इस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

कोर्ट का तर्क: ठोस आरोप और साक्ष्य जरूरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय न्यायसंगत और विधिसम्मत है। कोर्ट ने नोट किया कि वैवाहिक विवादों में अक्सर पूरे परिवार को सामान्य रूप से फंसाने की प्रवृत्ति देखने को मिलती है।

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पीड़िता के अधिवक्ता ने दलील दी कि उन्मोचन (प्रारंभिक) चरण में केवल प्रथम दृष्टया मामला देखा जाना चाहिए और ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों की विस्तृत विवेचना कर गलती की है।

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि निश्चित आरोप और सहायक साक्ष्यों के बिना रिश्तेदारों के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना गैरकानूनी होगा। इसलिए पति के रिश्तेदारों को आरोपों से मुक्त करना कानून की दृष्टि से उचित था।

Location :  Prayagraj

Published :  16 May 2026, 2:42 PM IST