Allahabad High Court: सहमति से बने संबंध को रेप नहीं! शादी का वादा टूटना हर बार अपराध नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी के वादे और सहमति से बने संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि हर असफल प्रेम संबंध को बलात्कार का मामला नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि महिला और पुरुष लंबे समय तक सहमति से रिश्ते में रहे हों और यह साबित न हो कि आरोपी ने शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा किया था, तो ऐसे मामले में रेप की धारा लागू नहीं होगी।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 21 May 2026, 1:27 PM IST

Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर महिला और पुरुष के बीच लंबे समय तक सहमति से शारीरिक संबंध बने हों और शुरुआत से शादी का इरादा न होने का कोई ठोस सबूत न मिले, तो ऐसे मामले को बलात्कार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने गोरखपुर के पिपराइच थाने में दर्ज एक एफआईआर और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

संजय कश्यप की याचिका पर हुई सुनवाई

यह फैसला न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की अदालत ने संजय उर्फ संजय कश्यप की याचिका पर सुनाया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों, खासकर अमल भगवान नेहुल बनाम महाराष्ट्र मामले का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि हर शादी का वादा “तथ्य का भ्रम” नहीं माना जा सकता।

शुरुआत से धोखा देने का इरादा साबित होना जरूरी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेप का मामला तभी बनता है जब यह साबित हो कि आरोपी ने शुरुआत से ही शादी का झूठा वादा किया था और उसका मकसद सिर्फ शारीरिक संबंध बनाना था। अगर बाद में परिस्थितियों या पारिवारिक मतभेदों के कारण रिश्ता टूटता है, तो इसे धोखा या भ्रम नहीं माना जाएगा।

चर्च या मंदिर में शादी को लेकर था विवाद

अदालत ने कहा कि पीड़िता ने खुद अपने पत्रों में स्वीकार किया था कि आरोपी का परिवार उसके साथ अच्छा व्यवहार करता था। दोनों पक्षों के बीच शादी चर्च में हो या मंदिर में, इसी मुद्दे पर विवाद हुआ और रिश्ता टूट गया। कोर्ट ने माना कि इससे यह साबित नहीं होता कि आरोपी का शुरू से शादी करने का इरादा नहीं था।

बालिग महिला को संबंधों के जोखिम की समझ होती है

कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता बालिग थी और नौवीं तक पढ़ी-लिखी थी। वह करीब एक साल तक रिश्ते में रही। अदालत के मुताबिक सक्षम उम्र की महिला को शारीरिक संबंधों और उनके परिणामों की समझ होती है। कोर्ट ने कहा कि “शादी” और “शादी का वादा” दोनों अलग बातें हैं।

एफआईआर को बताया दबाव बनाने की कोशिश

हाईकोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में आरोपी से शादी करने की इच्छा जताई थी। उसने 26 मार्च 2024 की कथित घटना का पहले कोई जिक्र नहीं किया। वहीं उसके दोस्त कृष्णा का बयान भी रिकॉर्ड में नहीं मिला। अदालत ने माना कि एफआईआर आरोपी पर शादी का दबाव बनाने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई प्रतीत होती है।

Location :  Prayagraj

Published :  21 May 2026, 1:01 PM IST