महराजगंज में मानसिक रूप से बाधित महिला की मौत के मामले में एनएचआरसी, राष्ट्रीय महिला आयोग और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी गई है। प्रशासन व पुलिस पर संवेदनहीनता और कानून उल्लंघन के आरोप लगे हैं।

मानवाधिकार आयोग से शिकायत
महराजगंज: जनपद में मानसिक रूप से बाधित एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना को प्रशासनिक संवेदनहीनता और कानूनी लापरवाही का परिणाम बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) सहित कई संवैधानिक एवं प्रशासनिक प्राधिकरणों को औपचारिक शिकायत भेजी गई है।
वरिष्ठ एडवोकेट एवं बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट के को-फाउंडर विनय कुमार पांडेय द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, पुलिस महानिदेशक (DGP) राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) और राज्य मानवाधिकार आयोग को ई-मेल के माध्यम से शिकायत प्रेषित की गई है। शिकायत में मानसिक रूप से असहाय महिला को समय रहते सहायता न मिलने पर गहरी चिंता जताई गई है।
शिकायत के अनुसार महिला की मानसिक स्थिति के बावजूद न तो समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और न ही आवश्यक संरक्षणात्मक उपाय अपनाए गए। आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने Mental Healthcare Act, 2017, दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और मानवाधिकार मानकों के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं किया।
मामले में यह भी कहा गया है कि जनपद में मानसिक रूप से विचलित, बेघर और असहाय नागरिकों के लिए कोई प्रभावी रेस्क्यू सिस्टम या शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं। साथ ही जिले में मानसिक रूप से विचलित महिलाओं एवं पुरुषों के लिए त्वरित राहत, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
यह मामला केवल एक महिला की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी, महिला सुरक्षा और मानवाधिकार संरक्षण से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है।