मुजफ्फरनगर के सांवली गांव के नाले में 17 गौवंश के बच्चों के शव मिलने से सनसनी फैल गई। एक महीने पहले भी 25 शव मिले थे। गौ सेवकों ने डेरी संचालकों और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

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Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां बेजुबान गौवंश के साथ अमानवीय व्यवहार की हदें पार कर दी गई। नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के सांवली गांव स्थित सुरेंद्रनगर नाले में एक के बाद एक 17 गाय-भैंस के छोटे बच्चों के शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। शव कट्टों में बंद कर नाले में फेंके गए थे, जिससे न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि गौवंश संरक्षण के सरकारी दावों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
नाले में मिले कट्टों ने खोला राज
शनिवार को स्थानीय लोगों ने नाले में कट्टे तैरते देखे, जिनसे तेज दुर्गंध आ रही थी। सूचना मिलते ही गौ सेवक निशु और पुलिस मौके पर पहुंची। जब कट्टे खोले गए तो अंदर गाय और भैंस के 17 छोटे बच्चों के शव मिले। इनमें दो भैंस के बछड़े बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी गौमाता के बछड़े थे। सभी शव नाले में बेरहमी से फेंके गए थे।
क्रेन से निकलवाए गए शव, हुआ अंतिम संस्कार
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की मौजूदगी में क्रेन की मदद से सभी शवों को नाले से बाहर निकलवाया गया। इसके बाद गौ सेवक निशु ने हिंदू रीति-रिवाज से नमक, कफन और गड्ढा खुदवाकर जमीन में सभी का अंतिम संस्कार कराया। मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम थी और माहौल बेहद गमगीन रहा।
एक महीना पहले भी मिली थी लाशों की खेप
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यही कोई पहली घटना नहीं है। करीब एक महीने पहले भी इसी नाले से 25 बछड़ों के शव बरामद हुए थे। यानी दो महीनों के भीतर लगभग 50 गौवंश के बच्चों का अंतिम संस्कार नाले से निकालकर करना पड़ा है। इसके बावजूद न तो ठोस कार्रवाई हुई और न ही जिम्मेदारों पर शिकंजा कसा गया।
डेरी संचालकों पर गंभीर आरोप
गौ सेवक निशु का आरोप है कि डेरी संचालक गाय और भैंस के नर बछड़ों को दूध नहीं पिलाते, जिससे वे भूख-प्यास से मर जाते हैं। मरने के बाद उनका अंतिम संस्कार करने के बजाय शवों को कट्टों में बंद कर नालों में फेंक दिया जाता है। निशु का कहना है कि यह न सिर्फ अपराध है, बल्कि घोर अमानवीय कृत्य भी है।
अधिकारियों की चुप्पी पर नाराजगी
इस घटना के बाद सनातनी समाज में भारी आक्रोश है। हैरानी की बात यह है कि जनपद का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं है। निशु गौ सेवक ने लापरवाह अधिकारियों, नगर पालिका और पशुपालन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच, टैगिंग और दोषियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
कार्रवाई की मांग तेज
गौ सेवकों का कहना है कि अगर समय रहते डेरी संचालकों की जांच और निगरानी नहीं की गई, तो ऐसी घटनाएं लगातार होती रहेंगी। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बार भी आंख मूंदे रहेगा या बेजुबान गौवंश को इंसाफ मिलेगा।