भारत में सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग ऐप्स के लिए KYC अनिवार्य करने का प्रस्ताव सामने आया है। संसदीय समिति की इस सिफारिश से फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन अपराधों पर रोक लग सकती है। हालांकि, इससे यूजर्स की प्राइवेसी और डिजिटल पहुंच को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Internet)
New Delhi: भारत में सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल आने वाले समय में पूरी तरह बदल सकता है। एक संसदीय समिति ने सुझाव दिया है कि सोशल मीडिया, डेटिंग और गेमिंग ऐप्स पर यूजर्स के लिए KYC यानी पहचान सत्यापन अनिवार्य किया जाए। अगर यह नियम लागू होता है, तो करोड़ों यूजर्स के डिजिटल अनुभव पर बड़ा असर पड़ सकता है।
दरअसल, यह सिफारिश महिला सशक्तिकरण से जुड़ी संसदीय समिति की चौथी रिपोर्ट (2025-26) में की गई है, जिसे हाल ही में संसद में पेश किया गया। रिपोर्ट में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए कई अहम सुझाव दिए गए हैं।
इनमें KYC अनिवार्यता के अलावा डीपफेक कंटेंट पर नियंत्रण, डिजिटल फॉरेंसिक सिस्टम को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और पीड़ितों को त्वरित सहायता देने जैसे कदम शामिल हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा चर्चा KYC नियम को लेकर हो रही है।
अब आखिरी समय पर टिकट कैंसिल किया तो पैसा गया! रेलवे का नया नियम जानकर चौंक जाएंगे आप
आज के डिजिटल दौर में फर्जी अकाउंट बनाना बेहद आसान हो गया है। इसका इस्तेमाल ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर बुलिंग, पहचान की चोरी और गलत जानकारी फैलाने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में असली आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हर अकाउंट को असली पहचान से जोड़ा जाए, तो इन अपराधों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। साथ ही, शिकायतों का निपटारा भी तेज और प्रभावी हो सकेगा।
समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सिर्फ एक बार KYC करना पर्याप्त नहीं होगा। समय-समय पर यूजर्स का दोबारा सत्यापन किया जाए। जिन अकाउंट्स पर बार-बार शिकायतें आती हैं, उन्हें चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जाए। इससे वे यूजर्स जो बार-बार नियम तोड़ते हैं और नए अकाउंट बनाकर लौट आते हैं, उन्हें रोका जा सकेगा।
रणवीर सिंह की ‘Dhurandhar 2’ बॉक्स ऑफिस पर छाई, क्या इससे ‘Bhoot Bangla’ को होगा नुकसान?
जहां एक ओर यह प्रस्ताव सुरक्षा बढ़ाने के लिए लाया गया है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े कुछ गंभीर सवाल भी सामने आए हैं। अधिक डेटा कलेक्शन से यूजर्स की प्राइवेसी को खतरा हो सकता है। डेटा लीक या दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ सकती है। इसके अलावा, देश में ऐसे कई लोग हैं जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में वे इन प्लेटफॉर्म्स से बाहर हो सकते हैं, जिससे डिजिटल पहुंच पर असर पड़ेगा।
फिलहाल यह सिर्फ एक सिफारिश है और सरकार ने इसे लागू नहीं किया है। लेकिन अगर इन सुझावों पर अमल होता है, तो भारत में सोशल मीडिया के इस्तेमाल का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।