अब नहीं चलेगा डिजिटल अरेस्ट का खेल, सरकार ने WhatsApp पर मांगा सख्त एक्शन; पढ़ें काम की खबर

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए WhatsApp पर इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध डिवाइस IDs को ब्लॉक करने की तैयारी शुरू कर दी है। I4C की रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया जा रहा है। फर्जी कॉल, वीडियो कॉल, नकली नोटिस और डराकर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों पर अब डिवाइस लेवल पर कार्रवाई की योजना है।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 21 March 2026, 4:40 PM IST

New Delhi: फर्जी पुलिस, नकली एजेंसी और वीडियो कॉल पर डराकर लोगों से पैसे ठगने वाले डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर अब सरकार ने बड़ा एक्शन लेने का संकेत दिया है। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार अब WhatsApp जैसे इंस्टैंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल हो रहे उन डिवाइस IDs को ब्लॉक कराने की तैयारी में है, जिनका इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट जैसे फ्रॉड में किया जाता है। यह पूरा मामला गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर यानी I4C की रिपोर्ट के बाद और गंभीरता से सामने आया है। सरकार का मानना है कि सिर्फ अकाउंट ब्लॉक करने से ठग नहीं रुकते, क्योंकि वे बार-बार नए अकाउंट बना लेते हैं। इसी वजह से अब डिवाइस लेवल पर रोक लगाने की रणनीति पर काम हो रहा है। सरकार पहले भी I4C के जरिए साइबर फ्रॉड से जुड़े हजारों WhatsApp अकाउंट, Skype IDs, फर्जी सिम और IMEI ब्लॉक कर चुकी है।

बार-बार नया अकाउंट बनाकर ठगी, अब उसी रास्ते पर रोक की तैयारी

असल परेशानी यही है कि साइबर स्कैमर्स एक अकाउंट बंद होने के बाद तुरंत दूसरा अकाउंट बना लेते हैं और फिर उसी तरह किसी नए शिकार को फंसाने लगते हैं। WhatsApp की लोकप्रियता का फायदा उठाकर ये लोग कॉल, वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए खुद को पुलिस, CBI, ED, कस्टम या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। इसके बाद वे कहते हैं कि आपके नाम से पार्सल पकड़ा गया है, बैंक खाते में गड़बड़ी है, या फिर किसी केस में आपका नाम आया है। डर और दबाव बनाकर वे पीड़ित को घंटों वीडियो कॉल पर रोके रखते हैं और इसी मानसिक दबाव को डिजिटल अरेस्ट का नाम दे देते हैं। I4C लगातार ऐसे फ्रॉड पर एडवाइजरी जारी कर रहा है और हाल में WhatsApp वेब रेंटिंग जैसे नए स्कैम्स पर भी चेतावनी दी गई है।

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WhatsApp, डेटा रिटेंशन और फर्जी ऐप्स पर भी सख्ती की तैयारी

सरकार अब यह भी देख रही है कि WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर और मजबूत सेफ्टी फीचर्स कैसे लागू कराए जाएं। आपकी दी गई जानकारी के मुताबिक डिलीट अकाउंट का डेटा 180 दिन तक सुरक्षित रखने, मैलिशियस APK फाइलों और फर्जी ऐप्स को पहचानकर ब्लॉक करने जैसे विकल्पों पर भी जोर है। यहां एक बात साफ करना जरूरी है कि 180 दिन डेटा सुरक्षित रखने वाली बात फिलहाल आपके इनपुट के आधार पर एक प्रस्ताव या विचार की तरह लगती है, क्योंकि मुझे अभी इसका कोई ताजा आधिकारिक आदेश नहीं मिला। लेकिन इतना जरूर है कि IT Rules 2021 के तहत इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स पर रिकॉर्ड, सूचना और सहयोग को लेकर पहले से नियम मौजूद हैं और सरकार साइबर अपराध की जांच को और मजबूत बनाने के लिए ऐसे प्रावधानों को कड़ा करने पर जोर दे सकती है।

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डिजिटल अरेस्ट क्या है

डिजिटल अरेस्ट नाम सुनने में जितना डरावना लगता है, असल में यह डर का कारोबार है। कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर आपसे कहता है कि आप किसी अपराध में फंस गए हैं, आप पर गिरफ्तारी की कार्रवाई होने वाली है, या आपको तुरंत जांच में सहयोग करना होगा। फिर वह कहता है कि आप कैमरे के सामने रहें, किसी से बात न करें, बैंक डिटेल्स दें या रकम किसी “सेफ अकाउंट” में ट्रांसफर करें। यही सबसे बड़ा जाल है। भारत में ऑनलाइन गिरफ्तारी जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। असली पुलिस या जांच एजेंसी फोन पर OTP, बैंक डिटेल्स या पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। संदेह होने पर तुरंत कॉल काटें, नजदीकी थाने से संपर्क करें, राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या आधिकारिक साइबर पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें। सरकार की टेलीकॉम सुरक्षा पहलों में Sanchar Saathi जैसे टूल्स भी शामिल हैं, जो नागरिकों को सुरक्षा संबंधी मदद देते हैं।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 21 March 2026, 4:40 PM IST