OpenAI CEO सैम ऑल्टमैन ने एक चौंकाने वाला उदाहरण साझा किया, जिसमें एक आम व्यक्ति ने ChatGPT की मदद से अपने कुत्ते के लिए कैंसर वैक्सीन तैयार की। यह AI की ताकत के साथ-साथ इसके संभावित खतरों पर भी सवाल खड़े करता है।

AI की ताकत का अनोखा उदाहरण (Img- Internet)
New Delhi: AI के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच Sam Altman ने एक ऐसा उदाहरण साझा किया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। उन्होंने बताया कि एक आम व्यक्ति ने ChatGPT की मदद से अपने पालतू कुत्ते के लिए कैंसर वैक्सीन तैयार करने का तरीका खोज लिया। यह कहानी AI की तेजी से बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है।
एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान ऑल्टमैन ने इस घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह व्यक्ति ऑस्ट्रेलिया से उनसे मिलने आया था और उसने अपने अनुभव साझा किए। ऑल्टमैन ने इसे अपनी हाल की सबसे "शानदार मुलाकातों" में से एक बताया।
ऑल्टमैन के अनुसार, यह व्यक्ति न तो वैज्ञानिक था और न ही किसी मेडिकल फील्ड से जुड़ा हुआ था। इसके बावजूद उसने ChatGPT की मदद से अपने कुत्ते की बीमारी को समझा और उसके लिए एक पर्सनलाइज्ड mRNA वैक्सीन डिजाइन करने की प्रक्रिया को सीखा। इसमें जेनेटिक सीक्वेंस की पहचान और वैक्सीन बनाने की समझ शामिल थी।
यह व्यक्ति केवल थ्योरी तक ही सीमित नहीं रहा। उसने आगे बढ़कर एकेडमिक रिसर्चर्स और प्रोफेसर्स से संपर्क किया, जिन्होंने लैब में जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने में मदद की। ऑल्टमैन के अनुसार, यह ऐसा काम था, जिसके लिए आमतौर पर एक बड़े रिसर्च संस्थान की जरूरत होती है।
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इस प्रयास का नतीजा बेहद सकारात्मक रहा। ऑल्टमैन ने बताया कि इस वैक्सीन के कारण कुत्ते की जान बच गई। अब वह व्यक्ति इस तकनीक का उपयोग अन्य पालतू जानवरों की मदद के लिए करने के तरीकों पर काम कर रहा है।
जहां यह कहानी AI के सकारात्मक उपयोग को दिखाती है, वहीं इससे जुड़े जोखिम भी सामने आते हैं। पॉडकास्ट के दौरान यह सवाल उठा कि अगर AI की मदद से वैक्सीन बनाई जा सकती है, तो इसका गलत इस्तेमाल भी संभव है।
ऑल्टमैन ने इस चिंता को स्वीकार किया और कहा कि AI डेवलपर्स के लिए सुरक्षा एक बड़ी प्राथमिकता है। OpenAI जैसी कंपनियां अपने सिस्टम को सुरक्षित बनाने पर काम कर रही हैं, लेकिन जैसे-जैसे AI आम लोगों तक पहुंच रहा है, जोखिम भी बढ़ रहे हैं।
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ऑल्टमैन ने ‘AI रेजिलियंस’ की अवधारणा पर जोर दिया। इसका मतलब है कि सिस्टम इतने सक्षम हों कि न केवल गलत उपयोग को रोक सकें, बल्कि किसी खतरे की स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया भी दे सकें। इसमें बीमारियों का जल्दी पता लगाना और इलाज का तेज विकास शामिल है।