
नई दिल्ली: चैत्र पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। यह दिन विशेष रूप से भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित होता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन विशेष रूप से चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है, जो सुख-समृद्धि और शांति के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
चैत्र पूर्णिमा की तिथि और शुभ मुहूर्त
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा का व्रत 12 अप्रैल, शनिवार को रखा जाएगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि का आरंभ सुबह 03:21 बजे से होगा और समाप्ति 13 अप्रैल, बुधवार को सुबह 05:51 बजे होगी। चूंकि उदयातिथि के अनुसार चैत्र पूर्णिमा 12 अप्रैल को पड़ रही है, इसलिए इस दिन व्रत, पूजा और दान का आयोजन किया जाएगा।
पूजा विधि
चैत्र पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यदि आप नदी में स्नान करने में असमर्थ हैं, तो घर में ही गंगाजल मिलाकर स्नान करने का महत्व है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।
पूजा में भगवान विष्णु को पीले रंग के फल, फूल और वस्त्र चढ़ाने चाहिए, जबकि मां लक्ष्मी को गुलाबी या लाल रंग के फूल तथा श्रृंगार का सामान चढ़ाना चाहिए। चैत्र पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा पढ़ने से भी पुण्य प्राप्त होता है।
इसके अलावा इस दिन चंद्रमा को पवित्र जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। यह माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा और अर्घ्य चंद्रमा की शुभ दृष्टि से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
चैत्र पूर्णिमा व्रत का महत्व
चैत्र पूर्णिमा का व्रत विशेष रूप से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और मानसिक शांति प्राप्ति के लिए किया जाता है। यदि इस दिन पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक संकट से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा इस दिन किए गए दान और स्नान से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में शांति का वास होता है।
Published : 8 April 2025, 11:06 AM IST
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