
महराजगंज: स्वच्छता का सपना दिखाने वाला स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण क्षेत्र में अपनी असलियत दिखा रहा है। लाखों रुपये की लागत से बने सामुदायिक शौचालय गांवों के लिए बस एक प्रतीक बन गया है, जबकि वास्तविकता यह है कि अधिकांश गांवों में यह शौचालय ताले में बंद हैं। योजना की असफलता के चलते गांव के लोग आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवादाता के अनुसार लक्ष्मीपुर ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत रजापुर में सामुदायिक शौचालय का निर्माण लगभग दो साल पहले हुआ था। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय केवल कभी-कभार ही खुलता है। यह भी किसी न किसी कारण से बंद रहते हैं, जिससे गांव के लोग मजबूरी में खुले में शौच करने को विवश हो रहे हैं। शौचालय की पानी और बिजली की सुविधाओं का अभाव गांव वासियों की समस्याओं को और बढ़ा रहा है।
इस सामुदायिक शौचालय के निर्माण पर सरकार ने लाखों रुपये खर्च किए हैं, लेकिन इसका सही उपयोग न होने के कारण योजना असफल साबित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जबसे यह शौचालय बना है, तबसे इसकी उपयोगिता कम ही रही है। शौचालय के अंदर कई कार्य अधूरे पड़े हुए हैं, और बाहर जिम्मेदार अधिकारियों के नाम की पेंटिंग कराकर खानापूर्ति की जा रही है।
यह स्थिति केवल रजापुर गांव की नहीं है बल्कि कई अन्य गांवों में भी सामुदायिक शौचालयों की हालत ऐसी ही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन को चाहिए कि वह इन सामुदायिक शौचालयों में जरूरी सुविधाएं जैसे पानी, बिजली और सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि ग्रामीण खुले में शौच से मुक्ति पा सकें।
Published : 6 March 2025, 3:33 PM IST
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