
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड की केदारघाटी अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के लिए जानी जाती है। यहां हर साल आयोजित होने वाला पारंपरिक जाख मेला क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। मेले की तैयारियां इस समय अपने अंतिम चरण में हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, मेले की तैयारी के चलते क्षेत्र के तीन गांवों - देवशाल, कोठेडा और नारायणकोटी में लॉकडाउन लगा दिया गया है।
बाहरी लोगों की नो एंट्री
परंपरा के अनुसार, मेले से तीन दिन पहले, अग्निकुंड तैयार करने के साथ ही गांवों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इस दौरान यहां तक कि रिश्तेदारों का भी गांव में आना वर्जित होता है। हालांकि, आधुनिक समय में कुछ छूट देखने को मिलती है, फिर भी कोशिश रहती है कि पुरानी परंपराओं को अक्षुण्ण रखा जाए। आज से यह लॉकडाउन शुरू हो गया है।
50 क्विंटल लकड़ियों से बनता है भव्य अग्निकुंड
ग्रामीणों ने मेले के लिए लकड़ी एकत्रित करने का काम शुरू कर दिया है। 50 क्विंटल लकड़ियों से विशाल अग्निकुंड तैयार किया जाएगा, जिसमें मुख्य रूप से बांज और पैंया के वृक्षों की लकड़ियां इस्तेमाल होती हैं। 14 अप्रैल की रात पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद अग्नि प्रज्वलित की जाएगी, जो पूरी रात धधकती रहेगी। इसी अग्निकुंड के दहकते अंगारों के बीच 15 अप्रैल को जाखराज भक्तों को आशीर्वाद देंगे।
नंगे पांव और विशेष वेशभूषा में जुटते हैं ग्रामीण
कुठेडा और नारायणकोटी के ग्रामीण नंगे पांव, सिर पर टोपी और कमर में कपड़ा बांधकर लकड़ियां और पूजन सामग्री जुटाते हैं। यह प्रक्रिया धार्मिक शुद्धता और परंपरा के पालन का प्रतीक मानी जाती हैं।
दो सप्ताह परिवार से अलग रहते हैं जाख राजा
जाख मेले की एक विशेष परंपरा के अनुसार, जाख राजा के पश्वा को दो सप्ताह पहले से अपने परिवार और गांव से अलग रहना होता है। इस अवधि में वे दिन में केवल एक बार भोजन करते हैं। इस बार नारायणकोटी के सच्चिदानंद पुजारी जाख राजा के पश्वा की भूमिका निभा रहे हैं।
क्षेत्रपाल के रूप में जाखराज की मान्यता
केदारघाटी के जाखधार स्थित जाख मंदिर को हजारों लोगों की आस्था का केंद्र माना जाता है। गढ़वाल क्षेत्र में कई स्थानों पर जाख मंदिर मौजूद हैं, लेकिन गुप्तकाशी-जाखधार का मेला अपनी विशिष्टता और भव्यता के लिए अलग स्थान रखता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार जाखराज क्षेत्र के रक्षक और सुख-समृद्धि के दाता हैं।
Published : 14 April 2025, 11:07 AM IST
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