
महराजगंजः स्नान, दान और पुण्य की मौनी अमावस्या 21 जनवरी को मनेगी। इस बार की मौनी अमावस्या एक खास संयोग में आने से महत्व और बढ़ गया है। मौनी अमावस्या पूर्ण अमृत योग में वरदान लेकर आ रही है। नदी में स्नान और दान, पुण्य करने से भक्तों के लिए यह कई गुना फलदाई साबित होगी। इस दिन मौन रहकर नदी का स्नान अति उत्तम माना गया है।
इसी दिन हुआ था कलयुग का आगमन
आचार्य पंडित दयाशंकर शुक्ल के अनुसार मकर राशि में मौनी अमावस्या का आगमन जब भी होता है, तो सूर्य और चंद्रमा गोचरवश एक साथ होते हैं। 21 जनवरी को पूर्वाखाड़ नक्षत्र में मौनी अमावस्या का संयोग हर्षण योग है। मान्यता के अनुसार संपूर्ण शक्ति से भरपूर दिन में मनु ऋषि के जन्म से अमावस्या का महत्व और बढ़ जाता है। मौनी अमावस्या के दिन दान, पुण्य, पूजन और स्नानादि से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। मौनी अमावस्या के दिन ही कलियुग का आगमन हुआ था। सुबह के समय ही कलियुग का प्रवेश हुआ था। कलियुग के प्रभाव से बचने के लिए मौन रहकर स्नान करें। इस दिन मौन रहकर गंगा या किसी नदी में स्नान से पुण्य मिलेगा।
यह भी विशेष
जिन जातकों का बुध ग्रह पीड़ित या अशुभ फल दे रहा है। वह लोग मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रहकर तुलसी के पौधे का पूजन करें तथा सुबह तुलसी पत्तियों का सेवन करें। हरी चूड़ियां व हरे रंग की साड़ी का दान करने से बुध ग्रह शुभ फल देने लगता है। जिन लोगों का चंद्र ग्रह अशुभ फल दे रहा है, वह लोग मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखें।
महाकाली की करें पूजा
अमावस्या तिथि की स्वामी महाकाली हैं। जीवन के कष्ट काल को दूर करने के लिए महाकाली की पूजा अति आवश्यक है। स्नान के बाद नदी की आरती करें। मंदिर में पूजा के बाद दान करें। स्नान के बाद शुभ संकल्प करने से जीवन के पाप-दोष दूर हो जाएंगे।
Published : 15 January 2023, 4:55 PM IST
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