
नई दिल्ली: आईएएस कोचिंग सेंटर में हुए हादसे ने कोचिंग हब में व्याप्त अंतहीन अव्यव्यवस्थाओं की पोल भी खोल कर रख दी है। देश के सिस्टम का हिस्सा बनने वाले छात्र सिस्टम का ही शिकार हो रहे है।
डाइनामाइट न्यूज़ ने राजेन्द्र नगर के कोचिंग हब की व्यापक पड़ताल की और यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों से बातचीत की। यहां पीजी में रहने वाले छात्र विवशता के चलते लूट के शिकार हो रहे हैं।
कोचिंग के लिये महंगी फीस देने वाले छात्रों से खोलीनुमा छोटे-छोटे कमरों के लिए मोटी रकम वसूली जा रही हैं।
देश के सबसे बड़े कोचिंग हब राजेन्द्र नगर में सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे बलिया निवासी आकाश दीप सिंह ने डाइनामाइट न्यूज़ को बताया छोटे से कमरे को किराये पर लेने को लिये यहां दलालों को कमीशन देना पड़ता है। हर कमरा यहां शेयरिंग के हिसाब से मिलता है, जिसमें दो या दो से अधिक छात्र (जियोमेट्रिक हिसाब) से रहते हैं। इस कमीशन के बाद हर छात्र द्वारा मकान मालिक को हर महीने लगभग 15500 रुपये बतौर किराया देना पड़ता है। हर रूम में दो या दो अधिक छात्र रहते हैं। इस तरह एक रूम से मकान मालिक को दो छात्रों से हर माह 31000 रुपए की आय होती है।
एक कमरे के लिये छात्रों द्वारा मकान मालिक को जो मोटी रकम दी जाती है, वह रकम किसी आलीशान होटल के किराये से कम नहीं होती। लेकिन इतनी भारी रकम चुकाने के बाद भी छात्रों को कई सुविधाओं का टोटा झेलना पड़ता है।
छात्रों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया छोटे से कमरे में दो छात्रों का गुजारा करना बेहद मुश्किल है, लेकिन मजबूरी के चलते उन्हे हालातों से समझौता करना पड़ता है।
मघ्य प्रदेश के रतलाम के रहने वाले एक अन्य छात्र विकास भी इसी तरह रूम शयेरिंग में रहता हैं। विकास ने बताया दलाल को कमीशन दिये बिना यहां कोई कमरा नहीं मिल सकता। मोटे किराये के बावजूद उन्हें खाना-पीना तो दूर, पीने का पानी भी बाहर से खरीद कर पीना पड़ता हैं।
छात्रों की व्यथा की ये कथा देश के अलग-अलग राज्यो से यहां आकर कोचिंग लेने वाले और राजेंद्र नगर में रहने वाले लाखों छात्रों की हैं। हमारा प्रशासन कितना चौकन्ना हैं, ये 3 छात्रों की हुई मौत से बखूबी समझा जा सकता है।
सरकार की अव्यस्थाओं के कारण कोचिंग सेंटर में तीन छात्रों की मौत के बाद यहां के छात्रों में भारी गम और गुस्सा है। ये छात्र भीषण गर्मी में उमस और बरसात की मार झेलने के बावजूद भी मृतक छात्रों के पीड़ित परिजनों के घावों पर मरहम लगाने का प्रयास कर रहे हैं। पिछले 72 घंटों से भी ज्यादा समय यहां तैयारी कर रहे छात्र इंसाफ की लडाई लड़ रहे हैं। वे पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
अफसोस की बात ये है कि तीन छात्रों की दर्दनाक मौत के चार दिन बाद भी अभी तक सरकार और शासन प्रशासन इन छात्रों की मांग व तकलीफों के प्रति उदासीन बना हुआ है।
Published : 30 July 2024, 5:40 PM IST
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