
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप ने जीत दर्ज कर ली है। अमेरिका के न्यूज चैनल Fox News ने ट्रंप की जीत का ऐलान किया है। समाचार चैनल के अनुसार, ट्रंप को 277 इलेक्टोरल वोट मिले हैं। डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस पर जीत दर्ज करते हुए ट्रंप अब दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे।
डोनाल्ड ट्रंप की जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दुनिया भर के तमाम नेताओं ने उन्हें बधाई दी है।
भारतीय-मूल के लीडर्स का शानदार प्रदर्शन
अमेरिका के चुनाव में भारत के नजरिए से एक बात काफी खास रही है। दरअसल, इस चुनाव में 9 भारतीय-मूल के लीडर्स ने प्रतिनिधि सभा के लिए दावेदारी पेश की थी। इनमें से 7 उम्मीदवार डेमोक्रेटिक पार्टी से मैदान में थे तो रिपब्लिकन पार्टी की ओर से 2 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, इन 9 उम्मीदवारों में से कुल 6 भारतीय अमेरिकियों ने प्रतिनिधि सभा के चुनाव में जीत दर्ज की है।
संसद में बढ़ी भारतीय अमेरिकियों की संख्या
पिछले चुनाव में पांच भारतीय अमेरिकियों ने जीत हासिल की थी। ऐसे में अब उनकी संख्या पांच से बढ़ गई है। यह दर्शाता है कि अमेरिका में भारतीय-मूल के अमेरिकियों का राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे कारण अब अमेरिकी संसद में भारत मूल के लोगों के मुद्दें और चुनाव में उनकी अहमियत भी काफी बढ़ गई हैं।
अमेरिका के चुनाव में जीतने वाले 6 भारतीय-मूल के लीडर्स में सुहास सुब्रमण्यम, प्रमिला जयपाल, अमी बेरा, राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना, श्री थानेदार का नाम शामिल हैं।
यहां से दर्ज की जीत
सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया सीट से जीत हासिल की है। इनके अलावा, कैलिफोर्निया से अमी बेरा ने चुनाव जीता है। वहीं इलिनोइस से राजा कृष्णमूर्ति बाजी मारने में सफल रहे हैं। कैलिफोर्निया से रो खन्ना ने जीत दर्ज की हैं। वाशिंगटन से प्रमिला जयपाल और मिशिगन से श्री थानेदार सांसद बनने में सफल रहे हैं।
अमेरिका के चुनाव में भारतीय अमेरिकी वोटर्स की वैल्यू और उनकी ताकत को इन 4 प्वाइंट्स से समझा जा सकता है।
1. बढ़ती जनसंख्या और वोटर बेस
भारतीय अमेरिकी समुदाय की जनसंख्या पिछले कुछ दशकों में बहुत बढ़ी है। वर्तमान में अमेरिका में लगभग 5.2 मिलियन भारतीय अमेरिकी हैं, जिनमें से लगभग 2.6 मिलियन वोट करने के योग्य हैं। ये लोग न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, न्यू जर्सी जैसे प्रमुख राज्यों में केंद्रित हैं, जो चुनावी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस समुदाय के मतदाता अक्सर संगठित होते हैं और इनका वोटिंग प्रतिशत भी अन्य आप्रवासी समुदायों के मुकाबले ऊँचा है।
2. स्विंग स्टेट्स में प्रभाव
भारतीय मूल के अमेरिकी कई स्विंग स्टेट्स में भी बड़ी संख्या में बसे हैं, जैसे कि मिशिगन, पेनसिल्वेनिया और जॉर्जिया। ये ऐसे राज्य हैं जहां कुछ हज़ार वोट भी चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने का मादा रखते हैं। भारतीय समुदाय का झुकाव इन राज्यों में चुनाव परिणाम को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे राजनीतिक दल भारतीय मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए विशेष प्रयास करते हैं।
3. राजनीतिक और आर्थिक योगदान
भारतीय अमेरिकी समुदाय का आर्थिक योगदान अमेरिका में बहुत बड़ा है। भारतीय अमेरिकी हाई एजुकेशन प्राप्त करने में आगे हैं और आईटी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, और व्यापार जैसी फील्ड् में टॉप स्थान पर हैं। इस समुदाय के पास अच्छी आर्थिक स्थिति होने के कारण, वे राजनीतिक अभियानों के लिए फंडिंग में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। उनके पास राजनीतिक अभियानों के लिए दान करने की क्षमता है, और यह योगदान उम्मीदवारों को आकर्षित करता है।
4. राजनीतिक चेतना और संगठित लीडरशिप
भारतीय अमेरिकी समुदाय की राजनीतिक चेतना बढ़ी है और अब उनके पास संगठित लीडरशिप भी है। कई भारतीय मूल के कई अमेरिकी नेता बडें पदों पर आसीन हैं और उनकी भागीदारी ने भारतीय समुदाय को मुख्यधारा की राजनीति में मजबूती दी है। भारतीय अमेरिकी नेताओं का समर्थन भी समुदाय के वोटों को प्रभावित करता है, और इससे राजनीतिक दलों के लिए भारतीय समुदाय का महत्व और बढ़ गया है।
निष्कर्ष
इन समीकरण को देखते हुए स्थिति स्पष्ट है कि भारतीय मूल के नागरिकों ने कमला हैरिस के मुकाबले ट्रंप पर ज्यादा विश्वास जताया है। रिपब्लिकन पार्टी के प्रति भारतीयों के जुड़ाव ने ट्रंप को फायदा है।
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Published : 6 November 2024, 8:40 PM IST
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