
लखनऊः प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ. शंकर चरण त्रिपाठी ने डाइनामाइट न्यूज़ से खास बातचीत में रक्षाबंधन पर्व के महत्व पर विस्तार डालते हुए बताया कि रक्षाबंधन का समुद्र से बहुत बड़ा संबंध है। उन्होंने रक्षाबंधन का भौगोलिक औऱ भौतिक आधार बताते हुए कहा कि रक्षाबंधन पूर्णिमा के दिन आता है और इसी दिन समुद्र में ज्वार भाटा उत्पन्न होती हैं, जिसका सीधा संबंध भी इससे है। यह भौतिक विज्ञान के तथ्य पर भी आधारित है।
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डाइनामाइट न्यूज़ से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह समुद्र से उत्पन्न चंद्रमा और लक्ष्मी के बीच भाई- बहन के प्यार को दर्शाता है। रक्षाबंधन को उन्होंने भाई- बहन के बीच सौहार्द, आपसी तालमेल, मिलन और रक्षा से जोड़ा। त्रिपाठी ने बताया कि यह रक्षा सूत्र न सिर्फ भाई और बहन के बीच प्रेरणास्तर, प्यार और भावना कायम रखता है बल्कि यह पर्व संपूर्ण मानव जगत को एक दूसरे जुड़ाव के बारे में भी बताता है।
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उन्होंने एक उदाहरण देकर रक्षाबंधन पर और प्रकाश डालते हुए बताया कि द्वापर युग में जब द्रौपदी ने देखा कि कृष्ण की अंगुली से खून निकल रहा हैं तो उन्होंने अपनी साड़ी से धागा निकालकर की कृष्ण की अंगुली पर बांधा, ताकि खून रुक जाये। आगे चलकर जब भी द्रौपदी को भीषण कष्ट हुआ तो कृष्ण ने आगे आकर हर वक्त उनकी मदद की।
रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त को लेकर उन्होंने बताया कि राहु काल को छोड़कर पूरा दिन रक्षाबंधन को समर्पित रहता है। सुबह 11 बजकर 17 मिनट से सांय 5 बजकर 14 मिनट तक बहनें भाइयों को राखी बांध सकती है, जो अमृत मुहूर्त है।
उन्होंने रक्षाबंधन पर सजाई जाने वाली थाल के महत्व के बारे में बताते हुए कि इसमें पूजा से संबंधित हर तरह की सामग्रियां रखी जानी चाहिये। विशेष तौर पर फल-फूल, चंदन का टीका, मिठाई, राखी आदि और इस बहिन द्वारा भाई के सामने पेश किया जाए, ताकि बहन और भाई के बीच यह प्यार जीवन भर कायम रह सके।
Published : 25 August 2018, 8:08 PM IST
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