
अगरतला: त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने निर्वाचन आयोग (ईसी) से राज्य में स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने का आग्रह किया साथ ही आरोप लगाया कि 2019 के लोकसभा चुनाव और पिछले उपचुनाव में लोग स्वतंत्र रूप से मतदान नहीं कर पाए थे और इस प्रकार से आयोग ने एक बुरी मिसाल कायम की थी।
विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के राज्य पहुंचने से करीब दो दिन पहले उन्होंने यह बयान दिया।
विवेकानंद मैदान में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) समर्थित श्रमिक संघ ‘सीआईटीयू’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरकार ने कहा, ‘‘ आपने 2019 लोकसभा चुनाव और त्रिपुरा में चार विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव में गलत मिसाल कायम की थी। मतदाता दोनों ही मौकों पर स्वतंत्र रूप से मतदान नहीं कर पाएं थे। ’’
उन्होंने दावा किया कि जब माकपा ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के कथित कदाचार की ओर निर्वाचन आयोग के पदाधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की तब, ‘‘ निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा था कि हम मतदान केंद्र के बाहर हो रही गतिविधियों के लिए जवाबदेह नहीं हैं और इन शिकायतों पर पुलिस गौर करेगी।’’
माकपा ने कहा, ‘‘इस बार अगर मतदाताओं को वोट डालने में परेशानियों का सामना करना पड़ा तो हम ऐसे बयानों से संतुष्ट नहीं होंगे। हम आपको याद दिलाना चाहते हैं कि मतदाता बिना किसी भय या डर के अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर सकें यह सुनिश्चित करना आपकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। आपको ऐसा माहौल बनाना होगा जहां प्रत्येक मतदाता के मताधिकार की रक्षा हो।’’
माकपा के नेता ने दावा किया कि भाजपा के पास आगामी विधानसभा चुनाव जीतने का ‘‘कोई मौका नहीं’’ है। उन्होंने चुनाव से पहले राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर भी सत्तारूढ़ भाजपा पर निशाना साधा।
सरकार ने कहा, ‘‘ हमें पता चला है कि राज्य में केंद्रीय बलों की 100 टुकड़ियां पहले ही आ चुकी हैं और 300 और आएंगी। आप केंद्रीय बलों की 1,000 टुकड़ियां तैनात कर सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ केंद्रीय बलों की भारी तैनाती एक चाल हो सकती है। उन्हें पता है कि लोग कुशासन से नाराज हैं।’’
Published : 9 January 2023, 1:04 PM IST
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