
नई दिल्ली: मधुमेह यानि डायीबिटिज देश और दुनिया की उन सबसे बड़ी बीमारियों में से एक है, जिसके इलाज और नियंत्रण की सबसे ज्यादा आवश्यकता महसूस की जा रही है। मधुमेह रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और दुनिया की बड़ी आबादी इसकी चपेट में आती जा रही है। हमारे वैज्ञानिकों और चिकित्सकों द्वारा इसके कारगर इलाज लगातार ढूढें जा रहे हैं। इसके इलाज के क्रम में देश की राजधानी दिल्ली में स्थित एम्स (अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान) को बड़ी कामयाबी मिली है। एम्स के डॉक्टरों ने मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए एक बहुत ही असरदार इलाज को ढूंढ निकाला है।
दो मेडिकल पैथी मिलाकर नई खोज
कोरोना की वैश्विक महामारी के बीच एम्स ने पहली बार एक ऐसा अध्ययन किया है, जिसमें दो-दो चिकित्सा पैथी को मिलाकर बीजीआर-34 की नई ताकत को खोज निकाला गया है। यह खोज से मधुमेह रोगियों में दिल से जुड़ी बीमारियों की संभावना को कम किया जा सकता है। एलोपैथी और बीजीआर-34 इन दो दवाओं को एक साथ देने से जहां मधुमेह तेजी से कम होता है।
ब्लड शुगर का स्तर रहेगा नियंत्रण में
डॉक्टरों ने एक नये अध्ययन में पाया है कि आयुर्वेदिक औषधि 'बीजीआर-34' और एलोपैथिक दवा 'ग्लीबेनक्लामाइड' को एक साथ लिया जाए तो ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रण में रहता है। इससे मधुमेह के रोगियों को बेहद फायदा होगा।
अध्ययन के अंतरिम नतीजों में नया दावा
एम्स के डॉक्टरों द्वारा किये गये इस नये अध्ययन के अंतरिम नतीजों में यह भी दावा किया गया है कि इससे न सिर्फ मधुमेह के रोगियों के जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि दिल के दौरे के जोखिम को कम करने में भी मददगार होगा। अन्य लोगों की तुलना में मधुमेह से ग्रसित लोगों को दिल की बीमारी और दूसरी बीमारियों से पीडि़त होने की संभावना दो से चार गुना अधिक होती है।
तीन चरणों में अध्ययन
जानकारी के मुताबिक एम्स के फार्माकिलॉजी विभाग के डॉ. सुधीर चंद्र सारंगी की निगरानी में हो रहे इस अध्ययन को तीन चरणों में किया जा रहा है, जिसका पहला चरण करीब डेढ़ साल की मेहनत के बाद अब पूरा हुआ है। इसके परिणाम बेहद उत्साहजनक मिले हैं। यह अध्ययन यदि पूरी तरह सफल होता है तो एम्स की इस खोज को मधुमेह के रोगियों के लिये बड़ा वरदान कहा जायेगा।
दोगुना असर
इस ताजा अध्ययन के अनुसार बीजीआर-34 और एलोपैथिक दवा ग्लिबेनक्लामीड का पहले अलग-अलग और फिर एक साथ परीक्षण किया गया। दोनों ही परीक्षण के परिणामों की जब तुलना की गई तो पता चला कि एक साथ देने से दोगुना असर होता है।
नकारात्मक प्रभाव कम
डॉक्टरों का कहना है कि इंसुलिन का स्तर बढ़ने से जहां मधुमेह नियंत्रित होना शुरू हो जाता है वहीं लेप्टिन हार्मोन कम होने से मोटापा और मेटाबॉलिज्म से जुड़े अन्य नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।
Published : 31 January 2021, 12:51 PM IST
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