
नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट में आज अयोध्या विवाद की सुनवाई के 31वें दिन सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कल के अपने बयान से यू-टर्न लेते हुए कहा कि वह राम चबूतरे को भगवान राम का जन्म स्थान नहीं मानता।
बोर्ड की ओर से जफरयाब जिलानी ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ के समक्ष स्पष्टीकरण दिया कि बोर्ड अभी तक यह नहीं मानता कि राम चबूतरा ही वह जगह हैं जहां भगवान राम का जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनका भी वहीं रुख है जो वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन का है।
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ज़फरयाब जिलानी ने यह स्पष्टीकरण मीडिया के कुछ हिस्सों में प्रकाशित उस रिपोर्ट को लेकर दी जिसमें कहा गया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी मान लिया है कि राम चबूतरा ही राम का जन्म स्थान था। बता दें कि इससे पहले खुद मुस्लिम पक्ष ने ये कहा था कि वो मानते हैं कि भगवान राम का जन्म उसी जगह हुआ था, लेकिन कहां वह नहीं बता सकते।
वहीं ज़फरयाब जिलानी ने 1862 की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें जन्म स्थान को एक अलग मंदिर बताया गया। न्यायमूर्ति बोबड़े ने कहा, “उनके गजेटियर में कहा गया है कि राम चबूतरा ही राम का जन्म स्थान है और केंद्रीय गुम्बद से 40 से 50 फ़ीट दूर है।” इस पर ज़फरयाब जिलानी ने कहा कि यह हिन्दुओं का विश्वास है उनका नहीं।
Published : 25 September 2019, 3:48 PM IST
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