
गोलकीपर वोजिन्हा (img:X)
New Delhi: फीफा विश्व कप 2026 के मैदान पर जहां दुनिया के बड़े-बड़े सितारे अपनी चमक बिखेर रहे हैं, वहीं एक ऐसे खिलाड़ी ने सबका ध्यान खींच लिया है जिसकी कीमत फुटबॉल बाजार में बहुत ज्यादा नहीं मानी जाती। केप वर्डे के 40 साल के गोलकीपर जोसिमार जोसे एवोरा डायस, जिन्हें पूरी दुनिया वोजिन्हा के नाम से जानती है, ने ऐसा प्रदर्शन किया कि स्पेन जैसी मजबूत टीम भी उनके सामने गोल करने के लिए तरस गई। उनके सात शानदार बचावों ने सिर्फ एक मैच का नतीजा नहीं बदला, बल्कि खिलाड़ियों की कीमत और असली काबिलियत को लेकर एक नई बहस भी शुरू कर दी।
विश्व कप के शुरुआती मुकाबलों में कई बड़े उलटफेर देखने को मिले। मोरक्को ने ब्राजील को चौंकाया, लियोनेल मेसी ने अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक लगाकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और क्रिस्टियानो रोनाल्डो की पुर्तगाल टीम कांगो के खिलाफ जीत हासिल नहीं कर सकी। लेकिन इन सभी चर्चाओं के बीच केप वर्डे और स्पेन का मुकाबला एक अलग वजह से सुर्खियों में आ गया।
केप वर्डे का यह विश्व कप में पहला मुकाबला था। सामने थी दुनिया की मजबूत टीमों में शामिल स्पेन, जिसके पास शानदार पासिंग गेम और बेहतरीन आक्रमण करने वाले खिलाड़ी थे। उम्मीद थी कि स्पेन आसानी से मुकाबला अपने नाम कर लेगा, लेकिन मैदान पर कहानी कुछ और ही रही। केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा ने स्पेन के हर बड़े हमले को रोक दिया। उन्होंने पूरे मुकाबले में सात ऐसे बचाव किए, जिन्हें देखकर फुटबॉल फैंस भी हैरान रह गए। स्पेन के खिलाड़ी लगातार गोल की कोशिश करते रहे, लेकिन वोजिन्हा की सतर्कता और अनुभव के आगे उनकी एक नहीं चली।
वोजिन्हा की कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जिस उम्र में कई खिलाड़ी अपने करियर के आखिरी दौर में पहुंच जाते हैं, उसी उम्र में उन्होंने विश्व कप जैसे बड़े मंच पर खुद को साबित किया। वोजिन्हा फिलहाल पुर्तगाल की द्वितीय श्रेणी की क्लब टीम जीडी चावेस के लिए खेलते हैं। उनके पास अनुभव की कोई कमी नहीं है और यही अनुभव स्पेन के खिलाफ मुकाबले में साफ दिखाई दिया। उन्होंने दिखा दिया कि फुटबॉल में सिर्फ नाम, पैसा या बाजार की कीमत मायने नहीं रखती।
वोजिन्हा के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत में सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई। कई फुटबॉल प्रशंसकों ने सवाल उठाया कि जिस खिलाड़ी ने विश्व कप में स्पेन जैसी टीम को रोक दिया, उसकी बाजार कीमत करीब 40 लाख रुपये बताई जाती है, जबकि भारत के कई खिलाड़ियों की कीमत इससे काफी ज्यादा है। मौजूदा जानकारी के मुताबिक भारतीय राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों का औसत बाजार मूल्य करीब 1.46 करोड़ रुपये के आसपास माना जाता है। वहीं भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू, अल्बीनो गोम्स और ऋतिक तिवारी की कीमतें भी वोजिन्हा से कई गुना अधिक आंकी जाती हैं।
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फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी की बाजार कीमत सिर्फ उसके मैदान पर प्रदर्शन से तय नहीं होती। इसमें कई चीजें शामिल होती हैं। खिलाड़ी किस लीग में खेल रहा है, उसके क्लब की आर्थिक स्थिति कैसी है, उसकी मांग कितनी है और ट्रांसफर मार्केट में उसकी स्थिति क्या है, इन सभी बातों का असर पड़ता है।
पूर्व भारतीय फुटबॉलर रॉबिन सिंह का कहना है कि खिलाड़ियों की कीमत तय करने में क्लबों की भूमिका सबसे अहम होती है। अगर किसी खिलाड़ी के लिए क्लब ज्यादा पैसा देने को तैयार हैं तो उसकी बाजार कीमत अपने आप बढ़ जाती है। वहीं पूर्व भारतीय मिडफील्डर मेहताब हुसैन का मानना है कि भारतीय फुटबॉल में कुछ खिलाड़ियों की कीमत जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है। उनके अनुसार बड़े क्लबों के बीच बेहतर टीम बनाने की होड़ और प्रतिस्पर्धा कई बार खिलाड़ियों की कीमतों को वास्तविक स्तर से ऊपर ले जाती है।
केप वर्डे के गोलकीपर वोजिन्हा का प्रदर्शन यह साबित करता है कि किसी खिलाड़ी की असली पहचान उसकी कीमत से नहीं बल्कि उसके प्रदर्शन से होती है। विश्व कप जैसे बड़े मंच पर कुछ मिनट या एक मैच भी किसी खिलाड़ी की पूरी तस्वीर बदल सकता है। अब भारतीय फुटबॉल में यह चर्चा तेज हो गई है कि खिलाड़ियों की कीमत तय करने का तरीका कितना सही है और क्या सिर्फ बाजार मूल्य के आधार पर किसी खिलाड़ी की क्षमता को आंका जा सकता है।
Location : New Delhi
Published : 20 June 2026, 8:15 AM IST