घर की सीढ़ियों की दिशा का वास्तु शास्त्र में खास महत्व बताया गया है। जानें क्लॉकवाइज सीढ़ियां क्यों मानी जाती हैं शुभ, गलत दिशा का क्या पड़ता है असर और नया घर बनाते समय किन बातों का रखें ध्यान।

घर की सीढ़ियों की दिशा का वास्तु शास्त्र (Img Source: Google)
New Delhi: घर बनाते समय लोग आमतौर पर कमरे, किचन और मेन गेट की दिशा पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन सीढ़ियों की दिशा को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में बनी सीढ़ियां सिर्फ ऊपर-नीचे जाने का रास्ता नहीं होतीं, बल्कि यह घर की ऊर्जा प्रवाह और सदस्यों की प्रगति से भी जुड़ी मानी जाती हैं।
वास्तु मान्यताओं के मुताबिक, सीढ़ियां घर में ऊर्जा के संचरण का माध्यम होती हैं। यदि उनका निर्माण सही दिशा और डिजाइन के अनुसार हो, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। इसका असर परिवार के स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आर्थिक स्थिरता पर पड़ता है।
वास्तु के अनुसार सीढ़ियां हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में यानी क्लॉकवाइज घूमती हुई बननी चाहिए। जब आप नीचे से ऊपर की ओर चढ़ें, तो सीढ़ियां पूर्व से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण की ओर घूमती दिखें। ऐसी दिशा में बनी सीढ़ियां प्रगति, आत्मविश्वास और करियर ग्रोथ को बढ़ावा देने वाली मानी जाती हैं। माना जाता है कि यह दिशा जीवन में स्थिरता और संतुलन लाती है।
अगर सीढ़ियां एंटी-क्लॉकवाइज यानी घड़ी की उलटी दिशा में बनी हों, तो इसे शुभ नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में घर के लोगों को बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। मेहनत का पूरा फल मिलने में देरी हो सकती है और मानसिक तनाव या अस्थिरता बढ़ सकती है। हालांकि यह पूरी तरह आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है, फिर भी कई लोग घर बनाते समय इन बातों का ध्यान रखना पसंद करते हैं।
वास्तु शास्त्र में माना गया है कि घर का हर कोना व्यक्ति के जीवन से जुड़ा होता है। सीढ़ियां चढ़ना प्रतीकात्मक रूप से प्रगति और उन्नति का संकेत देती हैं। इसलिए उनकी दिशा और संरचना को करियर ग्रोथ से जोड़ा जाता है। हालांकि आधुनिक विज्ञान में इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, लेकिन सकारात्मक सोच और संतुलित वातावरण निश्चित रूप से मानसिक शांति और बेहतर निर्णय क्षमता में मदद करता है।