
वरदा विनायक चतुर्थी (फोटो सोर्स-इंटरनेट)
New Delhi: अधिकमास में आने वाली वरदा विनायक चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। वर्ष 2026 में अधिकमास की वरदा चतुर्थी 20 मई, बुधवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार अधिकमास 17 मई 2026 से प्रारंभ हो रहा है। इस पावन चतुर्थी को मुद्गल पुराण में वरदा चतुर्थी के रूप में वर्णित किया गया है।
वरदा चतुर्थी 19 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर शुरू होकर 20 मई 2026 को सुबह 11 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन चतुर्थी मध्याह्न पूजन मुहूर्त सुबह 10:56 से 11:06 बजे तक रहेगा। वहीं वर्जित चंद्रदर्शन का समय सुबह 8:43 बजे से रात 11:08 बजे तक बताया गया है।
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धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर भविष्य पुराण के अनुसार, अधिकमास में की जाने वाली वरदा विनायक चतुर्थी का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस व्रत का पालन करने से सामान्य 12 मासों की चतुर्थी व्रत के बराबर या उससे भी अधिक पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत सभी प्रकार के विघ्नों को दूर कर जीवन में सुख, शांति, धन, संतान, यश और दीर्घायु प्रदान करता है। इसे आत्मिक और भौतिक दोनों प्रकार के कल्याण का मार्ग माना गया है।
अधिकमास को ‘अतिशय पुण्यप्रद मास’ कहा गया है, इसलिए इस समय किए गए गणपति व्रत का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से पूर्व जन्म के दोष और वर्तमान जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। यह व्रत साधक को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है और पितृगणों तथा देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है।
इस दिन प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थान को शुद्ध कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। गणपति को सिंदूर का तिलक अर्पित करना विशेष शुभ माना गया है। पूजा में 21 दूर्वा दल अर्पित करते हुए “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जाता है। इसके बाद गणेश जी को मोदक या प्रिय मिठाई का भोग लगाया जाता है और विधिवत आरती की जाती है। पूजा के पश्चात ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराना तथा दान देना शुभ माना गया है।
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"सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥"
मान्यता है कि गणेश जी को सिंदूर अर्पित करने से मानसिक शक्ति, आत्मविश्वास और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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Location : New Delhi
Published : 15 May 2026, 11:03 AM IST