Nautapa 2026: नौ दिन का ऐसा ‘आग का दौर’ जब सूरज दिखाएगा अपना असली कहर! ये 10 गलतियां पड़ सकती हैं भारी

नौतपा 2026 में सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ भीषण गर्मी का दौर शुरू होगा। यह 9 दिन प्रकृति और शरीर दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। जानिए क्यों इस अवधि को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 22 May 2026, 4:02 PM IST

New Delhi: भारत की सनातन परंपरा और वैदिक ज्योतिष में नौतपा को साल का सबसे तीव्र और चुनौतीपूर्ण समय माना गया है। इस अवधि में सूर्य देव जब रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो पृथ्वी पर तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में नौतपा 25 मई से 2 जून तक रहेगा, यानी पूरे 9 दिन तक भीषण गर्मी का प्रभाव रहेगा।

मान्यता है कि इन दिनों प्रकृति अपने चरम ताप पर होती है और मानव शरीर को विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि प्राचीन ग्रंथों में इन दिनों कुछ नियमों और सावधानियों का विशेष उल्लेख मिलता है।

रोहिणी नक्षत्र और सूर्य का रहस्य

ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshatra) को चंद्रमा का नक्षत्र माना जाता है, जो शीतलता और संतुलन का प्रतीक है। जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसकी तीव्र ऊर्जा चंद्रमा की शीतलता को प्रभावित करती है। इसका प्रभाव सीधे पृथ्वी के तापमान पर पड़ता है और गर्मी चरम पर पहुंच जाती है। इस अवधि को “महा-तप” भी कहा जाता है क्योंकि सूर्य अपनी अधिकतम ऊर्जा के साथ पृथ्वी को प्रभावित करता है।

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नौतपा के दौरान पालन करने योग्य महत्वपूर्ण नियम

नौतपा केवल मौसम का समय नहीं, बल्कि जीवनशैली को संतुलित करने का भी अवसर माना जाता है।

सुबह सूर्य को जल अर्पित करें

सुबह तांबे के लोटे से सूर्य को जल देने की परंपरा शुभ मानी जाती है। इससे मानसिक ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

पानी की बर्बादी से बचें

इन दिनों पानी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए इसे व्यर्थ बहाना पाप के समान माना गया है।

दोपहर की धूप से दूरी

तेज धूप में बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। जरूरी हो तो सिर ढककर ही बाहर जाएं।

प्रकृति की रक्षा करें

पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाना इस समय अशुभ माना गया है। प्रकृति को बचाना सबसे बड़ा कर्तव्य है।

स्वास्थ्य और परंपरा से जुड़े नियम

  • नौतपा में आयुर्वेद और परंपराओं के अनुसार जीवनशैली में बदलाव की सलाह दी जाती है।
  • मिट्टी के घड़े का पानी पीना शरीर को ठंडक देता है और पाचन को बेहतर बनाता है। वहीं तामसिक भोजन जैसे मांस, शराब, लहसुन-प्याज और अधिक मसालेदार भोजन से परहेज करने की सलाह दी जाती है।
  • हल्के और सादे भोजन से शरीर का संतुलन बना रहता है।

जल दान और सेवा का महत्व

इन 9 दिनों में जल दान को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। राहगीरों के लिए पानी की व्यवस्था करना, पक्षियों के लिए सकोरे रखना और जरूरतमंदों को शरबत या सत्तू देना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह परंपरा न केवल धार्मिक है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश देती है।

रंगों का भी होता है असर

मान्यता के अनुसार गहरे रंग जैसे काला और नीला कपड़ा इस समय गर्मी को अधिक आकर्षित करता है। इसलिए हल्के और सूती कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है ताकि शरीर ठंडा रहे।

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पशु-पक्षियों की सेवा का महत्व

नौतपा में जीव-जंतुओं के लिए पानी और भोजन की व्यवस्था करना पुण्यकारी माना जाता है। छतों और आंगनों में पानी रखने से कई बेजुबान जीवों को राहत मिलती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी क्या कहता है?

विशेषज्ञों के अनुसार यह समय वास्तव में भारत में प्री-मानसून हीटवेव का चरम होता है। नमी और गर्म हवाओं के कारण शरीर पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।

Location :  New Delhi

Published :  22 May 2026, 4:02 PM IST