Nautapa 2026: भीषण गर्मी के बीच पीएम मोदी की अपील, जानिए वेद-पुराणों में जलदान को सबसे बड़ा पुण्य क्यों कहा गया?

नौतपा 2026 के दौरान देश भीषण गर्मी और हीटवेव से जूझ रहा है। पीएम मोदी ने लोगों से पानी पीने और जरूरतमंदों को जल देने की अपील की है। वेद-पुराणों में जलदान को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है और इसे जीवन का आधार बताया गया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 27 May 2026, 3:51 PM IST

New Delhi: देश इस समय भीषण गर्मी और नौतपा की तपिश से गुजर रहा है। तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और कई क्षेत्रों में लू व हीटवेव की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सावधानी बरतने, पर्याप्त पानी पीने और जरूरतमंदों को जल उपलब्ध कराने की अपील की है। यह अपील केवल प्रशासनिक संदेश नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संकेत भी माना जा रहा है।

क्या होता है नौतपा और क्यों बढ़ जाती है गर्मी

ज्योतिष और भारतीय पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब पृथ्वी पर नौ दिनों तक अत्यधिक गर्मी का प्रभाव बढ़ जाता है। इसी अवधि को नौतपा कहा जाता है। बताया जा रहा है कि यह नौतपा 25 मई से शुरू हुआ है। इस दौरान उत्तर भारत सहित कई क्षेत्रों में तापमान तेजी से बढ़ता है और लू, जल संकट जैसी स्थितियां देखने को मिलती हैं।

रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र माना जाता है, लेकिन जब अग्नि तत्व के कारक सूर्य इसमें प्रवेश करते हैं तो पृथ्वी का तापमान और अधिक बढ़ जाता है। प्राचीन परंपराओं में इस समय को संयम, तप और जल संरक्षण का काल माना गया है।

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वेदों में जल को बताया गया जीवन का आधार

ऋग्वेद में जल को जीवन का मूल आधार बताया गया है। एक मंत्र में कहा गया है- “आपः स्वस्ति नः पिप्यताम्”, जिसका अर्थ है कि जल हमें शक्ति, शांति और जीवन प्रदान करे।

वेदों के अनुसार जल केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं है, बल्कि यह मन और चेतना को भी संतुलित करता है। इसी कारण भारतीय परंपरा में गर्मी के समय कुएं, बावड़ी, प्याऊ और मटकों की व्यवस्था की परंपरा विकसित हुई। आज भी गांवों और शहरों में घरों के बाहर रखा मटका इसी परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

पीएम मोदी की अपील और परंपरा से जुड़ाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि वे इस भीषण गर्मी में स्वयं को सुरक्षित रखें, पर्याप्त पानी साथ रखें और यदि संभव हो तो किसी प्यासे व्यक्ति को पानी अवश्य पिलाएं।

भारतीय संस्कृति में यह भावना हजारों वर्षों से मौजूद है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण में भी ग्रीष्म ऋतु में जलदान को अत्यंत पुण्यकारी बताया गया है। मान्यता है कि प्यासे को पानी पिलाने से व्यक्ति को अनेक यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि प्राचीन समय में राजा-महाराजा और व्यापारी यात्रियों के लिए प्याऊ बनवाते थे।

मिट्टी के मटके का महत्व

भारतीय परंपरा में मिट्टी के मटके को केवल बर्तन नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा साधन माना गया है। आयुर्वेद और वास्तु के अनुसार मटके में रखा पानी शरीर की गर्मी को संतुलित करता है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि मिट्टी का मटका पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखता है और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है।

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शास्त्रों की चेतावनी और व्यवहार पर प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि नौतपा के दौरान सूर्य की तीव्र ऊर्जा केवल मौसम ही नहीं, बल्कि मनुष्य के व्यवहार को भी प्रभावित करती है। इस समय क्रोध, थकान, मानसिक तनाव और जल की कमी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए शास्त्रों में अधिक पानी पीने, संयमित भोजन करने और दोपहर में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

Location :  New Delhi

Published :  27 May 2026, 3:51 PM IST