आज चंद्र ग्रहण के दौरान भारत के प्रमुख मंदिरों में पूजा और दर्शन रोके गए हैं। सूतक काल के कारण दिल्ली, काशी, अयोध्या और मथुरा के मंदिरों के कपाट सुबह बंद कर दिए गए और ग्रहण के समापन पर खोले जाएंगे।

मंदिरों के कपाट बंद (Img- Internet)
New Delhi: इस साल का पहला चंद्र ग्रहण आज यानी 3 मार्च मंगलवार को फाल्गुन पूर्णिमा को सिंह राशि, पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और धृति योग में लग रहा है। यह दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर 6:46 बजे समाप्त होगा। चंद्र ग्रहण के दौरान ब्लड मून का अद्भुत दृश्य भी देखने को मिलेगा।
चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले से शुरू होता है। इस बार यह सुबह 6:23 बजे प्रारंभ होकर ग्रहण के समापन तक रहेगा। इस दौरान किसी भी शुभ काम की मनाही होती है और मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। इस कारण दिल्ली, काशी, अयोध्या, मथुरा, वाराणसी और मिर्जापुर के प्रमुख मंदिरों में पूजा और दर्शन रोक दिए गए हैं।
दिल्ली के कालकाजी मंदिर और श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के कपाट सुबह 6:20 बजे बंद कर दिए गए। भक्तों को इस दौरान प्रवेश की अनुमति नहीं है। सूतक काल के बाद मंदिरों में मोक्ष और शुद्धिकरण से जुड़े रीति-रिवाज पूरे किए जाएंगे।
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अयोध्या के राम मंदिर को सुबह 9 बजे बंद कर दिया गया। वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के कपाट सुबह 4:30 बजे बंद किए गए और शाम 7:15 बजे फिर खोले जाएंगे। वहीं मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में भी दर्शन बंद किए गए हैं। मिर्जापुर की विंध्यवासिनी मंदिर में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई।
चंद्र ग्रहण 2026 (Img- Internet)
चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:46 बजे समाप्त होगा। भारत में दिखाई देने का समय 14-20 मिनट के आसपास रहेगा। खग्रास शाम 4:35 बजे प्रारंभ होकर 5:33 बजे समाप्त होगा, जबकि परमग्रास ग्रहण शाम 5:04 बजे होगा।
भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी एशिया, उत्तरी और मध्य अमेरिका, प्रशांत महासागर और पश्चिमी दक्षिण अमेरिका में भी देखा जा सकेगा। अफ्रीका और यूरोप में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
मंदिरों के कपाट बंद होने के कारण भक्तों को दर्शन और पूजा के लिए ग्रहण समाप्ति तक इंतजार करना होगा। मंदिर प्रशासन ने कहा है कि ग्रहण के बाद शुद्धिकरण और मोक्ष से जुड़ी विधियों के बाद ही भक्तों को दर्शन की अनुमति दी जाएगी।