सिद्धार्थ और तमन्ना के गाने ने बढ़ाई छठ की चमक, जानिए कौन हैं छठी मैया और क्या है इस महापर्व का महत्व

सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की अपकमिंग फिल्म 'द वन' के नए गाने 'छठी मैया' ने इस लोक महापर्व को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत में नहाय-खाय से लेकर उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देने तक के सख्त नियमों का पालन किया जाता है। पढ़ें विस्तार से...

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 12 September 2026, 3:51 PM IST

New Delhi: सनातन संस्कृति में लोक आस्था का महापर्व छठ विशेष स्थान रखता है। संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाने वाला यह चार दिवसीय अनुष्ठान इन दिनों विशेष चर्चा में है। हाल ही में अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा और अभिनेत्री तमन्ना भाटिया की आगामी फिल्म 'द वन' का 'छठी मैया' गीत रिलीज हुआ है, जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इस गीत के आने के बाद एक बार फिर वैश्विक स्तर पर छठ पर्व और इसकी परंपराओं को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। इस आलेख में जानिए कौन हैं छठी मैया और इस महापर्व के चार दिनों के नियम।

कौन हैं छठी मैया?

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, छठी मैया को सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की मानस पुत्री, भगवान कार्तिकेय की सेना की देवी देवसेना और जगत को प्रकाश देने वाले भगवान सूर्य की बहन माना जाता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण और स्कंद पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी छठी मैया का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से छठी मैया की पूजा करने से निसंतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है, आरोग्य बढ़ता है और घर-परिवार में सुख-शांति का स्थायी वास होता है।

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चार दिवसीय महापर्व के चरण और नियम

छठ पूजा का यह कठिन व्रत अनुशासन और शुचिता का प्रतीक है, जो चार दिनों तक विभिन्न चरणों में संपन्न होता है-

नहाय-खाय (पहला दिन): इस महापर्व की शुरुआत स्नान-ध्यान के साथ होती है। व्रती पवित्र नदियों या जलाशयों में स्नान करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इस दिन शुद्ध सात्विक भोजन के रूप में कद्दू की सब्जी, चने की दाल और चावल (भात) ग्रहण किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शारीरिक और मानसिक शुद्धि प्राप्त करना है।

खरना (दूसरा दिन): खरना के साथ ही व्रतियों का कठिन निर्जला उपवास आरंभ हो जाता है। इस दिन पूरे दिन उपवास रखने के बाद शाम को मिट्टी के नए चूल्हे पर गन्ने के रस या गुड़ और चावल से खीर बनाई जाती है, जिसके साथ रोटी का भोग तैयार किया जाता है। छठी मैया को प्रसाद अर्पित करने के बाद व्रती स्वयं इसे ग्रहण करते हैं और यहीं से उनका 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।

संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): पर्व के तीसरे दिन अष्टगामी (डूबते हुए) सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन बांस की सूप और टोकरियों में विभिन्न प्रकार के मौसमी फल, ठेकुआ और अन्य पूजा सामग्रियां सजाकर नदी या तालाब के घाटों पर जाया जाता है। व्रती जल के भीतर खड़े होकर अचल श्रद्धा के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।

सूर्योदय अर्घ्य और पारण (चौथा दिन): इस महापर्व का समापन चौथे दिन उगते हुए सूर्य (उदयाचल सूर्य) को अर्घ्य देकर होता है। अंतिम दिन व्रती प्रातःकाल पुनः घाट पर पहुंचते हैं और उगते सूर्य को जल अर्पित कर छठी मैया की वंदना करते हैं। इस दौरान परिवार की खुशहाली और संतान के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना की जाती है। सूर्य देव को अर्घ्य देने के उपरांत व्रती प्रसाद ग्रहण कर अपने व्रत का पारण करते हैं।

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छठ पूजा 2026 की मुख्य तिथियां

वर्ष 2026 में छठ महापर्व के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण दिवस इस प्रकार निर्धारित हैं-

नहाय खाय (प्रथम दिवस): 13 नवंबर 2026

खरना (द्वितीय दिवस): 14 नवंबर 2026

संध्या अर्घ्य (तृतीय दिवस): 15 नवंबर 2026

उषा अर्घ्य एवं पारण (अंतिम दिवस): 16 नवंबर 2026

नोट: इस लेख में दी गई समस्त जानकारियां सामान्य लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। डाइनामाइट न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Location :  New Delhi

Published :  12 September 2026, 3:51 PM IST