चैत्र नवरात्रि 2026: चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा विधि, महत्व और किन बातों का रखें ध्यान

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कुष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 21 March 2026, 5:04 PM IST
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1 / 6 \"Zoom\"Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी कुष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है। मां का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और तेजस्वी माना जाता है। वे सूर्य मंडल के मध्य में निवास करती हैं और अपनी शक्ति से सूर्य को नियंत्रित करती हैं। मां कुष्मांडा की आराधना से जीवन के कष्ट, रोग और दुख दूर होते हैं तथा साधक को यश, आयु और समृद्धि प्राप्त होती है।
2 / 6 \"Zoom\"देवी कुष्मांडा की आठ भुजाएं होती हैं और वे सिंह पर सवार रहती हैं। उनके सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा होते हैं। आठवें हाथ में जप माला रहती है, जो सिद्धियों और आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती है। उनका यह रूप शक्ति, ज्ञान और सृजन का प्रतीक है।
3 / 6 \"Zoom\"मां कुष्मांडा की पूजा के लिए विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है, जैसे कुमकुम, अक्षत, कलावा, घी, धूप, चंदन, तिल, पीले फूल, पीले वस्त्र, पीले रंग की मिठाई, फल और दीपक। पीला रंग देवी को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
4 / 6 \"Zoom\"पूजा की शुरुआत स्नान और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करने से करें। सबसे पहले कलश की पूजा करें। इसके बाद हाथ में फूल लेकर देवी का ध्यान करें और मंत्र “ॐ कुष्माण्डायै नमः” का जाप करें। देवी को पंचामृत से स्नान कराएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें कुमकुम, पीले चंदन और फूल अर्पित करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं तथा आरती करें। अंत में क्षमा प्रार्थना करें और शंखनाद के साथ पूजा समाप्त करें।
5 / 6 \"Zoom\"मां कुष्मांडा को पीले रंग की मिठाइयाँ जैसे केसरिया हलवा और पेठा विशेष रूप से प्रिय हैं। इसके अलावा मालपुआ, बताशे, दही और विभिन्न प्रकार के हलवे का भोग भी लगाया जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु इन प्रसादों को ग्रहण कर सकते हैं।
6 / 6 \"Zoom\"मां कुष्मांडा की पूजा से भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। उनकी कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 21 March 2026, 5:04 PM IST

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