
ब्रह्म स्थान (Img- Internet)
New Delhi: वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी घर या भवन के मध्य भाग को ब्रह्म स्थान कहा जाता है। यह स्थान पूरे घर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है। प्राचीन समय में इस स्थान को खुला आंगन रखा जाता था, जिससे सूर्य का प्रकाश और ताजी हवा पूरे घर में पहुंच सके।
आधुनिक समय में ब्रह्म स्थान को खुला रखना कम होता जा रहा है। आजकल लोग इस स्थान को ढक देते हैं या निर्माण कर देते हैं, जिससे घर में ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर का खुला क्षेत्र उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए, जिससे प्राकृतिक प्रकाश और हवा का प्रवेश बना रहे।
ब्रह्म स्थान से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह स्थान जितना साफ और व्यवस्थित रहेगा, उतना ही घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। यदि इस स्थान पर गंदगी या अव्यवस्था होती है, तो इसका असर घर के सदस्यों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
वास्तु के अनुसार ब्रह्म स्थान पर भारी निर्माण जैसे सीढ़ियां, बीम, खंभे या शौचालय नहीं बनाना चाहिए। यहां झाड़ू-पौछा, कचरा या पानी जमा करना भी अशुभ माना जाता है। इसके अलावा इस स्थान पर अग्नि से संबंधित कार्य जैसे किचन या हवन आदि भी नहीं करने चाहिए, क्योंकि इससे घर में तनाव और विवाद बढ़ सकते हैं।
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यदि ब्रह्म स्थान में कोई दोष हो गया है, तो उसे सुधारने के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक उपाय किए जा सकते हैं। नियमित रूप से भजन-कीर्तन, रामायण या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ कराने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
इस स्थान पर तुलसी का पौधा लगाना बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही रोजाना दीपक जलाने से घर में शांति और समृद्धि बनी रहती है। ये उपाय वास्तु दोषों को कम करने में सहायक होते हैं।
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यदि ब्रह्म स्थान पर पहले से ही निर्माण हो चुका है, जैसे सीढ़ियां या शौचालय, तो वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी होता है। सही उपाय अपनाकर घर के वातावरण को बेहतर बनाया जा सकता है।
आज के समय में भले ही घरों का स्वरूप बदल गया हो, लेकिन ब्रह्म स्थान का महत्व अभी भी उतना ही है। थोड़ी सी सावधानी और सही दिशा में प्रयास करके घर को सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर बनाया जा सकता है।
Location : New Delhi
Published : 10 April 2026, 2:45 PM IST
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