
दास भाव से ही प्रसन्न होते हैं हनुमान जी (Img-Dynamite News)
New Delhi: देशभर के हनुमान मंदिरों में भक्त अक्सर सिंदूर, चमेली का तेल और चोला चढ़ाकर बजरंगबली को प्रसन्न करते हैं। लेकिन राजस्थान के बाड़मेर में महाबार रोड स्थित 'दास हनुमान मंदिर' की कहानी सबसे जुदा है।
यहां वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार हनुमान जी को न तो तेल अर्पित किया जाता है और न ही सिंदूर लगाया जाता है। इसके बावजूद यहां दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है।
सफेद आकड़ा क्षेत्र में स्थित इस मंदिर में भक्त बिना किसी आडंबर या बाहरी चढ़ावे के केवल शुद्ध मन, आस्था और ध्यान के साथ आते हैं। मंदिर में भगवान हनुमान ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं। मान्यता है कि यहाँ शांतचित्त होकर ध्यान लगाने से साधक को असीम मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
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इस अनोखे धाम की स्थापना वर्ष 2003 में हुई थी। मांगीलाल संखलेचा की प्रेरणा और स्थानीय श्रद्धालुओं के सहयोग से यहाँ जयपुर के सफेद संगमरमर से तराशी गई दास हनुमान की अत्यंत शांत और दुर्लभ प्रतिमा स्थापित की गई। पिछले 23 वर्षों से मंदिर में एक 'अखंड ज्योति' लगातार प्रज्वलित हो रही है, जो यहाँ की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है।
मंदिर के पुजारी पंडित ओमप्रकाश जोशी बताते हैं कि श्रीरामचरितमानस में हनुमान जी को प्रभु श्रीराम का परम दास माना गया है। यहाँ सिंदूर या तेल चढ़ाने के बजाय 'दास भाव' से सेवा की जाती है। इस भाव से पूजा करने पर व्यक्ति के भीतर का अहंकार मिटता है और उसमें नम्रता व सच्चे समर्पण का भाव जागता है।
श्री सिद्धेश्वर महादेव विकास समिति द्वारा संचालित इस मंदिर में मंगलवार और शनिवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। भक्त यहाँ एकत्र होकर सुंदरकांड का पाठ करते हैं। हनुमान जयंती और मंदिर के वार्षिकोत्सव पर यहाँ मेले जैसा भव्य और भक्तिमय माहौल रहता है।
Location : New Delhi
Published : 4 August 2026, 9:08 AM IST