
प्रतीकात्मक छवि (Img- Pinterest)
Chandigarh: मनीमाजरा के रहने वाले लकी कुमार के परिवार में 18 अगस्त को खुशियों ने दस्तक दी थी, जब उनकी 22 वर्षीय पत्नी कोमल ने PGI चंडीगढ़ में एक नवजात को जन्म दिया। डिलीवरी के तुरंत बाद वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ ने परिवार को बधाई देते हुए बेटा होने की जानकारी दी।
PGI द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेजों में भी नवजात के लिंग के आगे मेल (पुरुष) दर्ज किया गया। परिवार इस खुशी को पूरी तरह मना भी नहीं पाया था कि अस्पताल के सिस्टम ने उनकी उम्मीदों को करारा झटका दे दिया।
अस्पताल में बेड उपलब्ध न होने की बात कहकर नवजात को 18 अगस्त की रात मोरिंडा के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। लेकिन अगले ही दिन, यानी 19 अगस्त को निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने जो खुलासा किया, उसने पूरे परिवार के होश उड़ा दिए।
डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि उनके पास लाया गया नवजात लड़का नहीं बल्कि लड़की है। कागजों में दर्ज जेंडर और सामने मौजूद नवजात की शारीरिक पहचान में इस भारी अंतर ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर तुरंत सवालिया निशान खड़े कर दिए।
घबराया परिवार जब इस गड़बड़ी की शिकायत लेकर दोबारा PGI पहुंचा, तो 20 अगस्त को नवजात को वापस बुला लिया गया। हालांकि, तब तक मासूम की हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी। हैरान करने वाली बात यह रही कि PGI के डॉक्टरों ने दोबारा भर्ती करते समय यह कह दिया कि नवजात का लिंग अभी 'स्पष्ट नहीं' है। इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया। एक तरफ मासूम की मौत का गम और दूसरी तरफ जेंडर के इस सस्पेंस ने पीड़ित परिवार को तोड़कर रख दिया है।
मासूम के पिता लकी कुमार ने अब PGI प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अस्पताल के पहचान टैग, सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर और मेडिकल रिकॉर्ड को तुरंत सील करने की मांग की है। सच सामने लाने के लिए परिवार ने नवजात का फॉरेंसिक और DNA टेस्ट कराने की अपील की है ताकि यह साफ हो सके कि बच्चा बदला गया था या सिर्फ कागजी लापरवाही हुई थी। वहीं, PGI के प्रवक्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन देते हुए कहा है कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Location : Chandigarh
Published : 23 August 2026, 8:57 AM IST