मोहाली की सड़कों पर ‘जंग’: आंसू गैस के गोलों से धुआं-धुआं हुआ आसमान, सिख बंदियों की रिहाई की मांग पर बरसीं लाठियां

मोहाली में स्वतंत्रता दिवस पर सिख बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शन के दौरान तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा पंजाब में लंबे समय से जारी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 August 2026, 3:26 PM IST

Chandigarh: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पंजाब के मोहाली में सिख बंदियों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बन गई। कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

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बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन

कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से जेलों में बंद सिख कैदियों यानी बंदी सिंहों की रिहाई की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि कई कैदी लंबे समय से जेलों में बंद हैं और उनमें से कई उम्रदराज या बीमार हो चुके हैं। ऐसे में मानवीय आधार पर उनकी रिहाई या पैरोल पर विचार किया जाना चाहिए।

कौन हैं बंदी सिंह?

‘बंदी सिंह’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर उन सिख कैदियों के लिए किया जाता है, जिन्हें 1980 और 1990 के दशक के पंजाब के उग्रवाद के दौर में विभिन्न गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया था और जो लंबे समय से जेलों में बंद हैं।

कौमी इंसाफ मोर्चा, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और कुछ सिख संगठन व राजनीतिक दल इन कैदियों की रिहाई या पैरोल की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि कई बंदी अपनी सजा की लंबी अवधि पूरी कर चुके हैं और उम्र व स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें राहत मिलनी चाहिए।

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पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का किया इस्तेमाल
प्रदर्शन के दौरान जब प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की स्थिति बनी तो पुलिस ने बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान लाठीचार्ज किए जाने की भी बात सामने आई है।

कई साल से जारी है मुद्दा

बंदी सिंहों की रिहाई का मुद्दा पंजाब में लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। कौमी इंसाफ मोर्चा वर्ष 2023 से मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर धरना दे रहा है और समय-समय पर प्रदर्शन करता रहा है।

वहीं, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का तर्क है कि संबंधित कैदी गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए हैं। इसलिए उनकी रिहाई या पैरोल के मामले में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

Location :  Chandigarh

Published :  15 August 2026, 3:26 PM IST