बंदी सिंहों की रिहाई की मांग पर जालंधर में चक्का जाम, सड़कों पर थमी रफ्तार, जानें बंद का पूरा हाल

बंदी सिंहों की रिहाई और अन्य मांगों को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा बुलाए गए पंजाब बंद का जालंधर में व्यापक असर दिखा। प्रमुख मार्गों और हाईवे पर जाम लगने से यातायात ठप रहा, हालांकि एंबुलेंस और दवा की दुकानें खुली रहीं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 August 2026, 12:02 PM IST

Chandigarh: कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा दिए गए 'पंजाब बंद' के आह्वान का असर जालंधर में बड़े पैमाने पर देखने को मिला। सुबह से ही शहर के प्रमुख मार्गों पर प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा शुरू हो गया, जिससे पूरे शहर में आवाजाही थम सी गई। बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर बुलाए गए इस बंद के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

प्रमुख चौराहों पर धरना, हाईवे पर ट्रकों की लंबी कतारें

जालंधर के रामामंडी चौक पर सिख इंसाफ मोर्चा के सदस्यों ने सड़क पर बैठकर धरना दिया, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। रास्ता बंद होने के कारण हाईवे पर खड़े ट्रक चालकों ने अपने वाहन आड़े-तिरछे खड़े कर दिए, जिससे जाम की स्थिति और गंभीर हो गई। इसके अलावा गुरु नानक मिशन चौक और जालंधर कैंट के आसपास के प्रमुख रास्तों को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

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बस अड्डा ठप, निजी स्कूलों ने की छुट्टी

परिवहन और शिक्षा क्षेत्र पर बंद का सीधा असर पड़ा। जालंधर बस अड्डा बंद रहने से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। शहर के अधिकांश निजी स्कूलों ने सुरक्षा के मद्देनजर पहले ही छुट्टी घोषित कर दी थी, जबकि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति न के बराबर देखने को मिली। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए अभिभावकों को सलाह दी है कि वे अपने स्थानीय प्रशासन से जानकारी लेकर ही बच्चों को बाहर भेजें।

अस्पताल और दवा की दुकानें खुलीं

बंद के उग्र असर के बीच राहत की बात यह रही कि आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को इससे पूरी तरह बाहर रखा गया है। शहर में अस्पताल, दवा की दुकानें (केमिस्ट शॉप्स) और एंबुलेंस सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं। मोर्चे के प्रतिनिधियों ने कहा कि मरीजों, बुजुर्गों और आपात स्थिति में निकले लोगों को रास्ता देने के लिए विशेष हिदायत दी गई है।

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क्यों शुरू हुआ विवाद और क्या हैं मुख्य मांगें?

कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से जेलों में बंद 'बंदी सिंहों' की रिहाई की मांग कर रहा है। इसके साथ ही जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने और 15 अगस्त को चंडीगढ़ में प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुए पुलिस मामलों को वापस लेने की मांग उठाई जा रही है। 15 अगस्त को चंडीगढ़ में पुलिस के साथ हुई तनातनी के बाद मोर्चा ने 21 अगस्त को राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया था।

बंद को लेकर बंटा नजर आया रुख

इस बंद को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) सहित कई सिख संगठनों का पुरजोर समर्थन मिला है। दूसरी ओर, पंजाब गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष कीमती भगत ने बंद के तरीके का विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हवारा की पैरोल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सड़कों को बंद करने से आम नागरिकों, मरीजों और श्रद्धालुओं को काफी कठिनाई होती है।

Location :  Chandigarh

Published :  21 August 2026, 12:02 PM IST