
घटनास्थल की तस्वीर (Img- X)
Faridabad: हरियाणा के फरीदाबाद स्थित सीही गांव में एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। करीब 250 से 300 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिरी तीन साल की मासूम नेहा जिंदगी की जंग हार गई। गाजियाबाद से आई NDRF, SDRF, हरियाणा पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने करीब 10 घंटे तक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, लेकिन सोमवार तड़के 3:50 बजे जब नेहा को बाहर निकाला गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि नगर निगम की आपराधिक लापरवाही का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं।
इस पूरे हादसे में सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सीही गांव में स्थित यह बोरवेल नगर निगम का है और पिछले करीब 10 से 15 वर्षों से बंद पड़ा था। पहले इस पर ढक्कन लगा हुआ था, लेकिन कुछ समय पूर्व इसका ढक्कन गायब हो गया। नगर निगम के एक्सईएन (XEN) संजीव कुमार का कहना है कि निगम को ढक्कन हटने की सूचना नहीं मिली थी।
सवाल यह उठता है कि घनी आबादी वाले इलाके में एक खुला बोरवेल महीनों तक 'मौत का कुआं' बना रहा और प्रशासनिक अमले को इसकी भनक तक नहीं लगी? जनता के टैक्स से चलने वाला सिस्टम एक ढक्कन लगाने में भी नाकाम साबित हुआ, जिसकी कीमत एक मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
LPU में विरोध के बाद बड़ा फैसला, 10 दिन बंद रहेंगी क्लास; मिड-टर्म परीक्षाएं स्थगित
रविवार शाम करीब 6 बजे नेहा अपने दोस्तों के साथ घर के पास खेल रही थी। खेलते-खेलते वह अचानक इस खुले पड़े बोरवेल में जा गिरी। बच्ची का सिर नीचे की तरफ था और वह 200 फीट से अधिक की गहराई पर जा फंसी। NDRF के डिप्टी कमांडेंट कुणाल तिवारी के मुताबिक, उन्हें शाम 7:45 बजे सूचना मिली और रात 9:05 बजे टीम मौके पर पहुंची।
रेस्क्यू के दौरान सबसे बड़ी बाधा यह आई कि बोरवेल में 125 फीट की गहराई पर गंदा पानी भरा हुआ था। इसके अलावा अत्यधिक गहराई और संकरे रास्ते के कारण आधुनिक रेस्क्यू उपकरण भी काम नहीं आ रहे थे।
जब राहत दल के पास मौजूद आधुनिक उपकरण 200 फीट की गहराई में उलटी फंसी मासूम तक पहुँचने में नाकाम साबित हुए, तो रेस्क्यू टीम ने स्थानीय समझदारी का सहारा लिया। मौके पर मौजूद एक स्थानीय कारपेंटर (बढ़ई) की मदद से तुरंत एक विशेष लोहे/लकड़ी का ढांचा तैयार किया गया।
काफी मशक्कत और जोखिम के बाद इसी देसी उपकरण के जरिए बच्ची के पैर को पकड़कर उसे बाहर खींचा गया। शुरुआती दौर में बच्ची के रोने की आवाजें आ रही थीं, लेकिन समय बीतने और पानी व ऑक्सीजन की कमी के कारण धीरे-धीरे आवाज आनी बंद हो गई थी।
नेहा के पिता रामदीन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले हैं और सीही गांव में मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। जिस वक्त यह हादसा हुआ, वे काम से लौट रहे थे। नेहा की मां का रो-रोकर बुरा हाल है; उनका कहना है कि वे केवल चाय बनाने अंदर गई थीं और पीछे से यह अनहोनी हो गई। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में नगर निगम और जिला प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है।
लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि अधिकारियों ने समय रहते ढक्कन लगवाया होता, तो आज नेहा जीवित होती। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और प्रशासन ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल वही है आखिर कब तक मासूमों की बलि चढ़ने के बाद ही सिस्टम की नींद खुलेगी?
Location : Faridabad
Published : 28 September 2026, 9:28 AM IST