कांग्रेस-DMK गठबंधन टूटने के पीछे की इनसाइड स्टोरी; राहुल गांधी के करीबी बोले- TVK के साथ मिलतीं 60 से ज्यादा सीटें

तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK के रास्ते अलग होने के बाद राहुल गांधी के करीबी प्रवीण चक्रवर्ती ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि राज्य के 75 फीसदी नेता विजय की TVK के साथ जाना चाहते थे और नतीजों के दिन विजय ने खुद राहुल से समर्थन मांगा था।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 22 May 2026, 10:44 AM IST

New Delhi: तमिलनाडु की सियासत में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और कांग्रेस के रास्ते अलग होने के बाद अब पर्दे के पीछे की राजनीतिक पटकथा साफ होने लगी है। कांग्रेस के डेटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट के चेयरमैन और राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले प्रवीण चक्रवर्ती ने राज्य की राजनीति को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि तमिलनाडु कांग्रेस का एक बहुत बड़ा हिस्सा शुरू से ही अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) के साथ गठबंधन करने के पक्ष में था। राज्य के जमीनी नेताओं का मानना था कि विजय का उभार सूबे में एक नई और धर्मनिरपेक्ष राजनीति की शुरुआत है, लेकिन दिल्ली के केंद्रीय नेतृत्व की रणनीतिक मजबूरियों के कारण यह गठबंधन चुनाव से पहले साकार नहीं हो सका।

इंदिरा भवन की बैठक और 75 प्रतिशत नेताओं की पसंद

प्रवीण चक्रवर्ती के अनुसार, चुनाव से पहले गठबंधन के इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तमिलनाडु कांग्रेस के करीब 40 शीर्ष नेताओं को विशेष तौर पर दिल्ली बुलाया गया था। दिल्ली के इंदिरा भवन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा नेता राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की मौजूदगी में एक-एक कर लंबी और गंभीर बैठकें हुईं। चक्रवर्ती ने दावा किया कि तमिलनाडु कांग्रेस के करीब 75 प्रतिशत कार्यकर्ता, पदाधिकारी और जमीनी नेता चाहते थे कि पार्टी DMK का दामन छोड़कर TVK के साथ स्वाभाविक गठबंधन करे। कार्यकर्ताओं को जमीन पर साफ दिख रहा था कि विजय की पार्टी बहुत तेजी से एक बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में उभर रही है, जहां कांग्रेस को ज्यादा सीटें और सम्मानजनक राजनीतिक हिस्सेदारी मिल सकती थी।

वरिष्ठ नेताओं का संशय और 60 सीटों का गणित

चक्रवर्ती ने बताया कि जहां नई पीढ़ी के नेता बदलाव के पक्ष में थे, वहीं दिल्ली के कुछ वरिष्ठ नेता, जो पिछले 20 सालों से DMK के साथ गठबंधन की राजनीति में सहज हो चुके थे, वे इस बड़े बदलाव के लिए तैयार नहीं थे। दिल्ली का नेतृत्व राष्ट्रीय राजनीति और संसद की जरूरतों के चलते जमीन पर हो रहे इस बड़े राजनीतिक बदलाव की गहराई को भांपने में पूरी तरह सफल नहीं रहा। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अगर चुनाव से पहले TVK और कांग्रेस के बीच गठबंधन औपचारिक रूप ले लेता, तो एक मोटे अनुमान के मुताबिक कांग्रेस को राज्य में 60 से अधिक सीटें मिलतीं और दोनों दल मिलकर अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब होते।

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मतगणना के दिन राहुल गांधी और विजय की वह सीक्रेट फोन कॉल

इस इंटरव्यू का सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा चुनाव नतीजों के दिन से जुड़ा है। प्रवीण चक्रवर्ती ने बताया कि मतगणना वाले दिन शाम करीब पांच बजे जब यह साफ हो गया कि TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है लेकिन बहुमत के आंकड़े से थोड़ी पीछे रह सकती है, तब विजय ने खुद राहुल गांधी को फोन किया था। इस बातचीत को खुद चक्रवर्ती ने कोऑर्डिनेट कराया था।

राहुल गांधी ने विजय को उनकी ऐतिहासिक जीत की बधाई दी, जिसके बाद विजय ने औपचारिक रूप से कांग्रेस से सरकार बनाने के लिए समर्थन मांगा। राहुल गांधी ने इस पर पार्टी के भीतर चर्चा करने की बात कही, जिसके बाद कांग्रेस की राजनीतिक मामलों की समिति ने बिना किसी विरोध के TVK को समर्थन देने पर सहमति जताई।

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चुनावी पारदर्शिता और विपक्ष की अगली बड़ी लड़ाई

कांग्रेस और DMK के अलग होने के बाद राहुल गांधी और एमके स्टालिन के रिश्तों पर बात करते हुए चक्रवर्ती ने स्पष्ट किया कि राज्य और केंद्र की राजनीति अलग होती है। जैसे बंगाल में टीएमसी और केरल में सीपीएम के खिलाफ लड़कर भी कांग्रेस दिल्ली में उनके साथ है, वैसा ही तमिलनाडु में भी रहेगा।

बातचीत के अंत में उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में विपक्ष डेटा और तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से चुनाव प्रणालियों में हो रही गड़बड़ियों को सुप्रीम कोर्ट और जनता के सामने उजागर करेगा। चक्रवर्ती के मुताबिक, जब सत्तापक्ष के पास विपक्ष से सौ गुना ज्यादा संसाधन हों, फिर भी उसे संस्थागत मदद की जरूरत पड़े, तो चुनावी पारदर्शिता ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी लड़ाई बन जाती है।

Location :  New Delhi

Published :  22 May 2026, 10:44 AM IST