एक सीट, कई दावेदार; सुलतानपुर में सपा के टिकट से क्यों बदल सकते हैं सियासी समीकरण?

सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में टिकट की दावेदारी चर्चा में है। सोनू सिंह, अनूप संडा और अरुण वर्मा समेत कई नेताओं के नाम सामने आने से पार्टी के सामने जनाधार, पुराने विवाद और संगठन की एकजुटता साधने की चुनौती है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 13 October 2026, 2:22 PM IST

Sultanpur: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सुलतानपुर की सियासत में टिकट को लेकर हलचल तेज होने लगी है। समाजवादी पार्टी के सामने यहां सिर्फ एक प्रत्याशी चुनने का सवाल नहीं है, बल्कि पुराने राजनीतिक विवाद, नेताओं की आपसी प्रतिद्वंद्विता और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को संभालने की भी चुनौती है। पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू की दावेदारी की चर्चा के बीच पूर्व विधायक अनूप संडा और अरुण वर्मा समेत कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। ऐसे में पार्टी का एक फैसला स्थानीय राजनीति की दिशा बदल सकता है। सवाल यह है कि सपा नेतृत्व किस नेता पर भरोसा जताएगा और टिकट की दौड़ में पीछे रहने वाले नेताओं को किस तरह साथ लेकर चलेगा?

सोनू सिंह की दावेदारी से क्यों बढ़ी सियासी हलचल?

सुलतानपुर विधानसभा सीट पर पूर्व विधायक चंद्रभद्र सिंह सोनू का नाम इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है। वर्ष 2024 में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए सोनू सिंह पहले इसौली विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। उनके समर्थक क्षेत्र में पुराने संपर्कों और राजनीतिक अनुभव को उनकी दावेदारी की ताकत बता रहे हैं। सोनू सिंह वर्ष 2002 और 2007 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर इसौली से विधायक चुने गए थे। इसके बाद वर्ष 2009 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। आगे चलकर वह पीस पार्टी और लोकदल से भी जुड़े। उनकी राजनीतिक यात्रा में अलग-अलग दलों के साथ काम करने का अनुभव शामिल रहा है।

अनूप संडा के अनुभव पर भी रहेगी नजर

सोनू सिंह के साथ पूर्व विधायक अनूप संडा का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। अनूप संडा सुलतानपुर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें बेहद कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। उनके समर्थकों का मानना है कि क्षेत्र में उनकी पुरानी सक्रियता और चुनाव लड़ने का अनुभव उन्हें टिकट की दौड़ में मजबूत दावेदार बना सकता है। अनूप संडा के सामने अपनी पिछली चुनावी स्थिति को राजनीतिक बढ़त में बदलने की चुनौती होगी। पार्टी नेतृत्व के लिए भी यह देखना अहम होगा कि पुराने प्रत्याशी पर भरोसा जताने से चुनावी आधार मजबूत होगा या किसी नए समीकरण के साथ आगे बढ़ना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

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अरुण वर्मा समेत कई नेताओं के नाम चर्चा में

सुलतानपुर सीट से वर्ष 2012 में विधायक रहे अरुण वर्मा भी संभावित दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में वह तीसरे और 2022 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। लगातार चुनाव लड़ने के अनुभव के चलते उनकी दावेदारी भी चर्चा में है। इनके अलावा सपा पिछड़ा वर्ग के प्रदेश सचिव विनोद जायसवाल, व्यापारी नेता मनोज अग्रवाल और शिक्षक ओपी वर्मा के नाम भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन नेताओं की दावेदारी को लेकर पार्टी की ओर से किसी आधिकारिक घोषणा की जानकारी नहीं है।

पुराना विवाद भी चर्चा में

सोनू सिंह की दावेदारी के साथ वर्ष 2010 में हुए रामकुमार यादव हत्याकांड का पुराना मामला भी राजनीतिक चर्चाओं में फिर सामने आया है। रामकुमार यादव की पत्नी कमला यादव और चंद्रभद्र सिंह सोनू के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है। कमला यादव ने अपने पति की हत्या के मामले में सोनू सिंह और उनके भाई मोनू पर आरोप लगाए थे। इस मामले का जिक्र स्थानीय राजनीतिक विमर्श में समय-समय पर होता रहा है। हालांकि, आरोपों और उनकी कानूनी स्थिति को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस प्रकरण का राजनीतिक महत्व अपनी जगह है, लेकिन इसे किसी नेता की चुनावी दावेदारी पर अंतिम निर्णय का आधार मानना भी सही नहीं होगा।

वर्ष 2019 के चुनाव में सोनू सिंह बसपा और कमला यादव प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के टिकट पर आमने-सामने थे। वर्ष 2024 में सोनू सिंह के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद कमला यादव ने सपा छोड़ दी थी। बीते आठ अक्टूबर को उनके आजाद समाज पार्टी में शामिल होने के बाद दोनों पक्षों से जुड़ा पुराना राजनीतिक टकराव फिर चर्चा में आ गया है।

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बगावत रोकना भी होगी बड़ी चुनौती

सुलतानपुर विधानसभा सीट पर प्रत्याशी चयन का असर केवल एक नेता की राजनीतिक महत्वाकांक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। टिकट की घोषणा के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया और दूसरे दावेदारों की भूमिका भी चुनावी रणनीति को प्रभावित कर सकती है। स्थानीय राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, प्रत्याशी चुनते समय जनाधार, जातीय और सामाजिक समीकरण, बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता और कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी होगा। अगर किसी एक दावेदार के पक्ष में फैसला होता है तो दूसरे नेताओं और उनके समर्थकों को साथ बनाए रखना भी पार्टी के लिए अहम रहेगा।

2027 से पहले सुलतानपुर सीट पर सबकी नजर

फिलहाल सोनू सिंह, अनूप संडा और अरुण वर्मा समेत अन्य संभावित दावेदारों के नामों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं। पार्टी नेतृत्व किस नेता को उम्मीदवार बनाता है, इसका फैसला आने वाले समय में स्पष्ट होगा। अभी किसी एक नाम को अंतिम प्रत्याशी मानना जल्दबाजी होगी। सुलतानपुर विधानसभा सीट पर सपा का टिकट आने वाले चुनाव के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसला साबित हो सकता है।

Location :  Sultanpur

Published :  13 October 2026, 2:22 PM IST