जिस मंत्री ने श्रावणी मेला में VIP संस्कृति पर रोक से लेकर AI व्यवस्था तक पर दिया जोर, उन्हीं की याद में नम हुईं आंखें

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद देवघर समाहरणालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें नम आंखों से याद किया। जिस श्रावणी मेले की तैयारियों में वे लगातार सक्रिय रहे, उसी देवघर में अब उनकी यादें चर्चा में हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 September 2026, 6:10 PM IST

Deoghar: झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के असामयिक निधन से पूरा राज्य शोक में है। पड़ोसी जिले देवघर से उनका गहरा जुड़ाव रहा। यही वजह है कि उनके निधन का असर बाबा बैद्यनाथ की नगरी में भी साफ नजर आया। सोमवार को देवघर समाहरणालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रशासनिक गलियारों का माहौल पूरी तरह गमगीन रहा।

समाहरणालय सभागार में उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया, पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर समेत जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी जुटे। सभी ने दिवंगत मंत्री को श्रद्धांजलि दी और उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। कुछ देर के लिए सभागार में पूरी तरह खामोशी छा गई।

देवघर से सिर्फ मंत्री के तौर पर नहीं था रिश्ता

सुदिव्य कुमार सोनू का देवघर से रिश्ता केवल पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं था। गिरिडीह से विधायक होने के कारण देवघर उनके लिए पड़ोसी जिला भी था और बाबा बैद्यनाथ की नगरी भी। श्रावणी मेला की तैयारियों के दौरान उनका देवघर आना-जाना लगातार रहा।

मेले की तैयारियों को लेकर वे अधिकारियों के साथ बैठक करते और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर सीधे सवाल पूछते थे। पेयजल, सफाई, स्वास्थ्य, शौचालय, सुरक्षा, ट्रैफिक और पार्किंग से लेकर कांवरिया पथ तक कई मुद्दे उनकी प्राथमिकता में रहे।

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VIP दर्शन पर सख्त रुख बना था चर्चा का विषय

श्रावणी मेला को लेकर उनकी सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात पर हुई, वह थी VIP और VVIP के आउट ऑफ टर्न दर्शन पर रोक की पैरवी। उनका कहना था कि आम श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े रहें और किसी खास व्यक्ति को अलग रास्ते से दर्शन मिले, यह व्यवस्था ठीक नहीं है। उनकी प्राथमिकता साफ थी कि मेले में आम श्रद्धालु को बेहतर सुविधा और सम्मान मिले।

AI से हाईटेक मेला बनाने पर भी था जोर

सुदिव्य सोनू की सोच केवल भीड़ प्रबंधन तक सीमित नहीं थी। श्रावणी मेला को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए फेस रिकग्निशन, AI आधारित इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम, AI ट्रैफिक मैनेजमेंट, डिजिटल हेल्पलाइन और QR कोड आधारित फीडबैक सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया।

देवघर-बासुकीनाथ फोरलेन को लेकर भी वे सक्रिय रहे। उनका उद्देश्य था कि मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं का आवागमन ज्यादा सुरक्षित और आसान हो।

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बड़ी योजनाओं में भी दिखी देवघर की तस्वीर

सुदिव्य कुमार सोनू धार्मिक पर्यटन को बड़े स्तर पर विकसित करने की सोच रखते थे। रांची से देवघर हॉली टूरिस्ट कॉरिडोर की योजना भी इसी सोच का हिस्सा थी। करीब 201 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर में रांची, रजरप्पा, लुगुबुरू, पारसनाथ और देवघर जैसे धार्मिक स्थलों को जोड़ने की परिकल्पना थी। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,020 करोड़ रुपये बताई गई थी।

उनकी सोच थी कि बाबा बैद्यनाथ आने वाला श्रद्धालु केवल मंदिर तक सीमित न रहे, बल्कि आसपास के धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक भी पहुंचे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिल सके।

कुछ दिन पहले तक सक्रिय थे

राजकीय श्रावणी मेला-2026 के दौरान भी सुदिव्य सोनू देवघर से जुड़े रहे। जिस मेले की तैयारियों को लेकर वे अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे, उसी मेले के समाप्त होने के कुछ ही समय बाद उनके निधन की खबर ने देवघर को स्तब्ध कर दिया।

Location :  Deoghar

Published :  7 September 2026, 6:10 PM IST