सियासी गलियारों में खलबली: रामदास अठावले ने किया विपक्ष में ‘बड़ी सेंध’ का दावा, क्या पास होगा महिला आरक्षण बिल?

महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दो-तिहाई बहुमत का बड़ा दावा किया है। क्या विपक्ष में सेंधमारी और डीएमके-कांग्रेस की दूरी से बदलेगा देश का सियासी नक्शा? जानिए नया गणित।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 July 2026, 12:13 PM IST

New Delhi: देश की राजनीति में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने और देश की चुनावी सीमाओं को री-ड्रॉ करने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर एक बार फिर संसद में महासंग्राम छिड़ने वाला है। केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास अठावले के एक चौंकाने वाले बयान ने मानसून सत्र से ठीक पहले सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

अठावले का दावा है कि इस बार संसद में नंबर गेम पूरी तरह बदल चुका है और एनडीए सरकार के पास अब वह जादुई आंकड़ा मौजूद है, जिसकी कमी से पिछली बार संविधान संशोधन विधेयक गिर गया था।

अठावले का नया नंबर गेम और विपक्ष की घेराबंदी

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के प्रमुख रामदास अठावले ने सीधे तौर पर विपक्षी खेमे में बड़ी दरार के संकेत दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों का रुख एनडीए के प्रति नरम हुआ है और वे इस ऐतिहासिक विधेयक के समर्थन में आ सकते हैं।

इससे भी बड़ी बात उन्होंने यह कही कि डीएमके (DMK) अब कांग्रेस से अलग राह चुन रही है। अठावले ने हुंकार भरते हुए कहा, "हमारे पास अब दो-तिहाई बहुमत है। आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक हर हाल में पारित हो जाएंगे।"

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संसद के पिछले सत्र की कसक और '352' का जादुई आंकड़ा

दरअसल, यह पूरा मामला इसी साल 17 अप्रैल को संसद के विस्तारित सत्र के दौरान देखने को मिला था। तब विधानसभाओं में 2029 से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों का दायरा बढ़ाने (परिसीमन) के लिए लाया गया संविधान संशोधन विधेयक निचले सदन में गिर गया था।

उस समय पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। कुल 528 वोटिंग सदस्यों में से दो-तिहाई बहुमत के लिए सरकार को 352 मतों की जरूरत थी, जिसमें वह 54 वोट पीछे रह गई थी। तब कांग्रेस, सपा और टीएमसी ने मिलकर इस विधेयक को पराजित कर दिया था।

2029 का नया खाका और परिसीमन का बड़ा दांव

अठावले के इस नए दावे ने विपक्षी दलों की नींद उड़ा दी है। अगर यह विधेयक पास होता है, तो 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले देश का राजनीतिक भूगोल पूरी तरह बदल जाएगा।

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सीटों की संख्या बढ़ने से नए समीकरण बनेंगे और महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें सुरक्षित हो जाएंगी। हालांकि, अठावले के इस दावे के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वाकई विपक्ष के कुनबे में टूट हो चुकी है या यह सिर्फ मानसून सत्र से पहले का एक मनोवैज्ञानिक दांव है।

Location :  New Delhi

Published :  16 July 2026, 12:13 PM IST