
संसद का विशेष सत्र
New Delhi: राजधानी में संसद का विशेष सत्र आज से शुरू होते ही सियासी हलचल तेज हो गई, जब केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन विधेयक 2026 पेश किया। इस दौरान विपक्ष की ओर से K. C. Venugopal ने कई अहम सवाल उठाए, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई। सरकार इस सत्र में तीन बड़े विधेयक लाने जा रही है, जिनका मकसद महिला आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना है। यह सत्र न केवल विधायी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक टकराव और बहस के चलते आने वाले समय की दिशा तय करने वाला भी माना जा रहा है।
नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में परिसीमन बिल पर बोलते हुए कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ पल ऐतिहासिक होते हैं और यह वही समय है। उन्होंने कहा कि यह कदम 25-30 साल पहले उठाया जाना चाहिए था। भारत को 'मदर ऑफ डेमोक्रेसी' बताते हुए उन्होंने इसकी लंबी लोकतांत्रिक परंपरा पर जोर दिया।
अखिलेश यादव ने भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि SIR और फॉर्म 7 के इस्तेमाल से उनकी मंशा उजागर हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए वोट काटने की कोशिश हुई। चुनाव आयोग को शिकायत के बाद प्रक्रिया रुकी, लेकिन अब तक इस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है।
अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे लेकर कई गंभीर सवाल हैं। उन्होंने राम मनोहर लोहिया के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने पूछा कि भाजपा इस मुद्दे पर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए पूछा कि 21 राज्यों में उनकी सरकारों में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा, विधायकों में उनकी संख्या 10% से कम है और लोकसभा में भी उनकी भागीदारी सवालों के घेरे में बनी हुई है।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित किया गया था और इसके प्रावधान 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि लोकसभा की सदस्य संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिससे कुल सीटें बढ़कर 815 हो जाएंगी। इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो सदन की कुल संख्या का एक-तिहाई होगा। मेघवाल ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया से किसी भी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा और उनकी मौजूदा राजनीतिक ताकत बनी रहेगी।
कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि कानून मंत्री के बयान से ऐसा प्रतीत हुआ जैसे पहली बार सदन में महिला आरक्षण पर बहस हो रही हो, जबकि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने भाषण में एक खास ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई है।
गोगोई ने आगे कहा कि करीब तीन साल पहले गृह मंत्री ने भी इसी तरह की बातें कही थीं और आज के बयान से उनका 90 प्रतिशत मेल है। उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन इसे सरल बनाकर तुरंत लागू किया जाना चाहिए और इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
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संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा शुरू, कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल बोले- यह ऐतिहासिक निर्णय का वक्त
Akhilesh Yadav क्यों बोले- जब प्रधानमंत्री को पिछड़ों से वोट चाहिये था...#Akhileshyadav #Samajwadiparty @Samajwadiparty @Dimpleyadav @yadavakhilesh #ParliamentSpecialSession pic.twitter.com/6v3XYhG2fg
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लोकसभा में पेश तीनों बिलों पर 17 अप्रैल शाम 4 बजे वोटिंग होगी, जबकि आज और कल इन पर चर्चा जारी रहेगी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार सुनने और जवाब देने के लिए तैयार है। चर्चा के लिए 12 घंटे का समय तय किया गया है।
बिलों को पुनर्स्थापित करने के लिए पहले ध्वनि मत से पास कराने की कोशिश हुई, लेकिन विपक्ष की मांग पर मत विभाजन कराया गया। इसके बाद हुई वोटिंग में पक्ष में 251 और विपक्ष में 185 वोट पड़े, जिससे सरकार को स्पष्ट बढ़त मिल गई।
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सदन में बिल पेश करने के लिए पहले ध्वनि मत से पारित कराने की कोशिश हुई, लेकिन विपक्ष ने मत विभाजन की मांग की। इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने वोटिंग की अनुमति दी, जिसमें पक्ष में 207 और विपक्ष में 126 वोट पड़े।
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डीएमके सांसद टी. आर. बालू ने सदन में पेश तीनों बिलों का कड़ा विरोध करते हुए इन्हें सैंडविच बिल बताया और कहा कि ये आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए उनकी पार्टी विरोध कर रही है। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने टिप्पणी की कि काले या पीले झंडे दिखाने से सदन की कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ता।
सपा सांसद अखिलेश यादव ने जनगणना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। इस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि जनगणना प्रक्रिया जारी है और सरकार जातीय जनगणना कराने का भी निर्णय ले चुकी है।
लोकसभा में परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव के पेश होते ही जोरदार हंगामा देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इसका कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि संसद का दायित्व संविधान की रक्षा करना है, न कि उसकी मूल भावना को कमजोर करना। उन्होंने आरोप लगाया कि डिलिमिटेशन प्रक्रिया को जनगणना से अलग करना संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है।
अर्जुन राममेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन बिल पेश किया।
लोकसभा के विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही सदन का माहौल भावुक हो गया। शुरुआत में सांसदों ने महान गायिका आशा भोसले के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
Location : New Delhi
Published : , IST
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