
नीतीश कुमार ने ली शपथ (फोटो सोर्स: गूगल)
New Delhi: नीतीश कुमार ने एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वह देश के पहले ऐसे नेता बन गए हैं जो मुख्यमंत्री रहते हुए ही राज्यसभा के सदस्य बने हैं। आमतौर पर देखा गया है कि नेता पहले मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं और उसके बाद ही राज्यसभा की राह पकड़ते हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने इस परंपरा को तोड़ते हुए नया उदाहरण पेश किया है।
बिहार की सियासत में यह पहली बार हुआ है जब कोई मुख्यमंत्री अपने पद पर रहते हुए ही उच्च सदन का सदस्य बना है। इससे पहले जितने भी नेता राज्यसभा पहुंचे, उन्होंने पहले मुख्यमंत्री पद छोड़ा और फिर संसद के ऊपरी सदन में एंट्री की। नीतीश कुमार का यह कदम न सिर्फ राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, बल्कि इसे एक रणनीतिक फैसले के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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देश में कई ऐसे बड़े नेता रहे हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री रहने के बाद राज्यसभा का रुख किया। शिबू सोरेन, जो झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, उन्होंने पद छोड़ने के बाद राज्यसभा की सदस्यता ली। इसी तरह दिग्विजय सिंह, जो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, उन्होंने भी कुर्सी छोड़ने के बाद राज्यसभा का रास्ता चुना। शरद पवार, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री, भी इसी परंपरा का हिस्सा रहे हैं।
वहीं महबूबा मुफ्ती ने जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद राज्यसभा सदस्यता हासिल की। इसके अलावा बिप्लब कुमार देव, जो त्रिपुरा के मुख्यमंत्री रहे, उन्होंने भी इस्तीफा देने के बाद राज्यसभा में एंट्री ली।
नीतीश कुमार के नाम सिर्फ यही एक रिकॉर्ड नहीं है। वह बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं और अब तक 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। उन्होंने लंबे समय तक बिहार की सत्ता संभाली है और राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है।
Location : New Delhi
Published : 10 April 2026, 5:12 PM IST